राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) में पैसों की बर्बादी किस तरह हो रही है, इसके एक नहीं बल्कि कई ताजा उदाहरण सामने आए हैं। कभी जरूरत न होने के बावजूद टीमों में बदलाव, कभी खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाकर होटल-यात्रा का अतिरिक्त खर्च और कभी बच्चों को सैकड़ों किलोमीटर भेजकर बिना खिलाए वापस करना, हर स्तर पर चयन और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले से 16 खिलाड़ी पुणे में, मैच के नतीजे से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, फिर ये फैसला क्यों? राजस्थान की टीम पुणे में सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी के सुपर लीग में खेल रही है। टीम शुरुआती दो मैच हारकर फाइनल की दौड़ से बाहर हो चुकी है। मंगलवार को अंतिम मैच है, इसके बावजूद अनिल सिन्हा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने दो नए खिलाड़ियों-मोहित चांगरा और हेमंत कुमार को जोड़ दिया। पहले से ही 16 खिलाड़ी पुणे में हैं और मैच के नतीजे से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, तो इस फैसले की जरूरत क्या थी। एक लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च इन दो खिलाड़ियों को जोड़ने से आरसीए पर करीब एक लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। दोनों की जयपुर से मुंबई फ्लाइट, मुंबई से पुणे टैक्सी और पुणे में होटल ठहराव खर्च आरसीए करेगा। तय भी नहीं कि ये प्लेइंग-11 में उतरेंगे भी या नहीं। अंडर-19; 5 अतिरिक्त खिलाड़ियों का अतिरिक्त खर्च आरसीए उठाएगा अव्यवस्था यहीं नहीं रुकी। मंगलवार को जयपुर में राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बीच अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी का लीग का अंतिम मैच खेला जाना है। इसके लिए 15 की जगह 20 खिलाड़ियों का चयन कर दिया गया। इन अतिरिक्त खिलाड़ियों के लिए होटल और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च भी आरसीए को उठाना पड़ेगा। सवाल यह है कि जब पहले हर मैच के लिए 15-15 खिलाड़ियों की टीम भेजी जा रही थी, तो अब अचानक यह संख्या क्यों बढ़ाई गई? अंडर-14; दो-दो टीमें पहुंचीं, खेली एक भी नहीं अंडर-14 स्टेट चैंपियनशिप में जोधपुर में भी चौंकाने वाला मामला सामने आया। पाली की दो टीमें (कुल 40 बच्चे) जोधपुर पहुंच गईं, लेकिन एक भी टीम को खेलने नहीं उतारा गया। विवाद बढ़ने पर पाली के मैच जोधपुर से जयपुर शिफ्ट कर दिए। हैरानी की बात यह है कि बच्चों और उनके माता-पिता को परेशान होना पड़ा, जबकि आरसीए एडहॉक कमेटी द्वारा गठित टीम को ही खिलाने के निर्देश थे, फिर भी उस टीम को जोधपुर में खेलने नहीं दिया गया।