वागड़ में छोटीसादड़ी क्षेत्र के अंबावली गांव के किसान ने फिलीपींस का सॉफ्ट गन्ना उगाया है। अब उसी से बीज तैयार कर अन्य किसानों के लिए भी आय का नया रास्ता खोल दिया है। मिठास, रस और सॉफ्टनेस के चलते यह गन्ना बाजार में तेजी से पहचान बना रहा है। अंतिम कुमार जैन बताते हैं कि यह गन्ना सामान्य किस्म की तुलना में काफी सॉफ्ट होता है। इसकी खासियत यह है कि बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर दांत वाले लोग भी इसे आसानी से खा सकते हैं। गन्ने में रस की मात्रा अधिक होने के साथ मिठास भी ज्यादा होती है, इसी कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। 3 साल पहले एक गन्ने से शुरू हुआ सफर अंतिम कुमार ने बताया कि तीन साल पहले वे फिलीपींस वैराइटी का एक गन्ना करीब 500 रुपए में लेकर आए थे। उसी एक पौधे के बीज को धीरे-धीरे बढ़ाते हुए अब वे आधे बीघा क्षेत्र में गन्ने की खेती कर रहे हैं। ज्यादा किसानों तक यह किस्म पहुंचे, इसके लिए वे गन्ने का बीज भी बेच रहे हैं। तीसरी फसल तक बढ़ती है मोटाई और रस किसान अंतिम कुमार के अनुसार एक बार गन्ना बोने के बाद तीसरी फसल तक उसकी मोटाई और रस दोनों बढ़ जाते हैं। यह गन्ना हाथ से आसानी से छीला जा सकता है, जिससे इसकी खपत और लोकप्रियता दोनों बढ़ी है। जैविक तरीके से कर रहे खेती अंतिम कुमार गन्ने की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इसमें किसी प्रकार के रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता। देसी तरीकों से तैयार खाद और पौधों की पत्तियों से बनी जैविक खाद का ही उपयोग किया जाता है। जैविक होने के कारण उपभोक्ताओं में इसकी मांग और भरोसा दोनों ज्यादा है। नई वैराइटी ‘गोल्डन शेड’ पर भी काम अब अंतिम कुमार इसी मॉडल पर आगे बढ़ते हुए गोल्डन शेड नामक नई गन्ना वैराइटी पर भी काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह किस्म अगले साल बड़े स्तर पर गांव में दिखाई देगी, जिससे किसानों की आय में और इजाफा हो सकता है। वे अन्य किसानों को भी इस वैराइटी की बुवाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मेवाड़ की मिट्टी गन्ने के लिए उपयुक्त अंतिम कुमार बताते हैं कि मेवाड़ क्षेत्र की मिट्टी गन्ने की खेती के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त है। पहले भी यहां बड़े स्तर पर गन्ने की खेती होती रही है। गन्ना लगभग हर प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है, हालांकि अत्यधिक रेतीली जमीन में उत्पादन कुछ कम हो सकता है। सिंचाई और बीज की जरूरत गन्ने की सिंचाई सामान्यतः हर 15 दिन में करनी होती है, जबकि बारिश के मौसम में अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। नई भूमि पर बीज की आवश्यकता होती है, जबकि पुरानी फसल में कटिंग से ही आसानी से अगली फसल तैयार की जा सकती है। हाइब्रिड और प्रयोगात्मक किस्मों के लिए बीज का उपयोग किया जाता है।