जयपुर में व्यापारी हरिशंकर (40) की हत्या के मामले में शिवदासपुरा थाना पुलिस ने आरोपी दोस्त और उसके साढ़ू (पत्नी की बहन का पति) भाई को मंगलवार दोपहर अरेस्ट किया। आरोप है कि यह वारदात एक करोड़ रुपए की उधारी नहीं चुकाने के लिए की गई थी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बिजनेसमैन की हत्या के समय से लेकर शव ठिकाने लगाने तक हत्या का आरोपी दोस्त के साथ उसका साढ़ू भाई ने मदद की। कार की डिक्की में शव डालने के बाद पानी की टंकी पर दोनों ने हाथ धोए। शव ठिकाने लगाने के लिए करीब 18 घंटे तक शहर व बाहर परिचित की कार लेकर घूमते रहे। जब परिचित ने कार वापस मांगी तो उसे कार में लाश रखी होने की बात बताई। शिवदासपुरा थाना पुलिस की ओर से हत्या को लेकर विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है। CCTV में दिखे आरोपी… झगड़ा होने पर आरोपी की उंगली चबाई डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज वर्मा ने बताया- बिजनेसमैन हरिशंकर की हत्या के मामले में दोस्त सीताराम और उसके साढ़ू भाई संदीप को गिरफ्तार किया गया है। हत्या के दोनों आरोपी सीताराम और संदीप हॉस्टल चलाते हैं। सीताराम 3 हॉस्टल चलाता है, जबकि उसका साढ़ू भाई संदीप हॉस्टल किराए पर देकर चलवाता है। प्राइवेट पार्ट व सिर में लगी चोट से मौत ACP (चाकसू) भवानी सिंह ने बताया- 13 जून की शाम करीब 7 बजे हरिशंकर पैसों की बातचीत करने सीताराम के पास गया था। वहां सीताराम और उसका साढ़ू संदीप बैठे हुए थे। पैसों की बातचीत को लेकर दोनों दोस्त हरिशंकर और सीताराम में कहासुनी हो गई। गाली-गलौच होने पर सीताराम की हाथ की उंगली को हरिशंकर ने चबा डाला। गुस्से में सीताराम ने हरिशंकर के प्राइवेट पार्ट पर लात मार दी। दर्द से कराहते हुए बेहोशी की हालत में हरिशंकर नीचे गिरा। नीचे गेट चौखट पट्‌टी से उसके सिर में गंभीर चोट लगी। इसके कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शव को ठिकाने लगाने की प्लानिंग 13 जून की रात करीब 7:30 से 8 बजे के बीच हरिशंकर की हत्या के दौरान संदीप (साढ़ू) बैठकर पूरी घटना देखता रहा। हरिशंकर के मरने का पता चलते ही दोनों ने बचने के लिए लाश ठिकाने लगाने का प्लान बनाना शुरू किया। किसी को पता नहीं चले, इसलिए बेसमेंट में रखे गाय-भैंस के भूसे में शव को छिपा दिया। दोनों ने प्लान बनाया कि किसी ऐसी जगह शव को ठिकाने लगा देंगे, जिससे किसी को पता नहीं चले। प्लास्टिक के कट्टे में बांधा भूसे में शव को छिपाने के बाद घरवालों को पता नहीं चले, इसलिए दोनों अपने-अपने घर चले गए। अगले दिन 14 जून को सुबह सीताराम और संदीप वापस आए। दोनों ने प्लास्टिक के कट्टे में जैसे-तैसे शव को डालकर रस्सी से बांध दिया। पिछले एक-दो दिन से हॉस्टल में रहने वाले परिचित की सीताराम कार यूज कर रहा था। दोपहर करीब 12 बजे उसी कार की डिग्गी में दोनों ने शव को डाल बंद कर दिया। इसके बाद घर के बाहर लगी पानी की टंकी में दोनों ने हाथ धोए। 18 घंटे लेकर घूमते रहे लाश हाथ धोने के बाद किसी को शक नहीं हो, इसलिए सीताराम आस-पड़ोसी के पास बातचीत करने आ गया। उसका साढ़ू भाई संदीप कार को घर से ले जाकर कुछ दूरी पर रोड किनारे खड़ा कर आया। दोपहर करीब 1 बजे दोनों साढ़ू भाई लाश ठिकाने लगाने के लिए कार लेकर निकले। पूरे दिन लाश ठिकाने लगाने के लिए शहर और उसके आस-पास घूमते रहे। लोगों की आवाजाही और पकड़े जाने के डर से लाश को ठिकाने लगाा काफी मुश्किल हो गया। रात के अंधेरे में भी वह लाश ठिकाने लगाने के लिए घूमे, लेकिन मृतक की पहचान पर पकड़े जाने के डर से फेंक नहीं सके। करीब 18 घंटे लाश को ठिकाने लगाने के लिए दोनों साढ़ू भाई घूमते रहे। कार मांगने पर चला पता कार के मालिक ने सुबह करीब 6 बजे सीताराम को कॉल किया। कार की जरूरत होने की बताकर देने को कहा। कई बार टालमटोल के बाद परिचित ने उसकी कार लौटाने की जिद करनी शुरू कर दी। गुस्से में आकर सीताराम ने झगड़े में बिजनेसमैन की हत्या करने और उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए कार में रखी होना बताया। परिचित को उसकी कार को गलत यूज लेने का पता चलने पर डर बैठ गया। उसने कॉल कर पुलिस को सारी बात बता दी। हत्या के आरोपियों के मोबाइल नंबर को ट्रेस कर पहुंची पुलिस को कार में लाश मिल गई। पुलिस ने सीताराम को पीछा कर पकड़ा। पूछताछ में मददगार साढ़ू का नाम सामने आने पर उसे भी पकड़ा गया। —- यह खबर भी पढ़िए… जयपुर में 1 करोड़ के विवाद में व्यापारी की हत्या:कार में लाश डालकर ठिकाने लगाने पहुंचा आरोपी; दोस्त ने फोन कर पुलिस को बताया जयपुर में 1 करोड़ रुपए के विवाद में व्यापारी की हत्या कर दी गई। 2 दिन से लापता व्यापारी का शव सोमवार सुबह सड़क किनारे खड़ी कार में मिला। आरोपी ने व्यापारी की हत्या के बाद शव को चारे के ढेर में छुपा दिया था। इसके बाद से लाश को ठिकाने लगाने की फिराक में थे। (पूरी खबर पढ़ें)