नगर निगम क्षेत्र में कचरा उठाने वाली गाड़ियों की मनमानी अब नहीं चलेगी। अब हर वाहन को तय समय पर अपने क्षेत्र में पहुंचकर कचरा उठाना अनिवार्य होगा। इसकी नियमित निगरानी के लिए निगम डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सहित सभी वाहनों पर 24 घंटे सुपरविजन सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) तैयार हो चुका है, जो अगले माह यानी नए साल से चालू हो जाएगा। स्मार्ट सिटी ऑफिस में बने कंट्रोल रूम में एक प्रोजेक्ट मैनेजर, दो आईटी एक्सपर्ट और करीब 10 कर्मचारी लगातार मॉनिटरिंग करेंगे। परियोजना से जुड़े कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी जारी है। आईसीसीसी में शहर के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की दैनिक रिकॉर्डिंग भी होगी, जिससे सीवरेज ट्रीटमेंट का पूरा डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध रहेगा। नगर निगम के पास वर्तमान में लगभग 200 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन और करीब 50 अन्य वाहन हैं, जिनमें सीवरेज मशीन, डंपर, जेसीबी और काऊ-कैचर शामिल हैं। अब तक यह देखा गया है कि कई बार चालक कम जगहों से कचरा उठाकर लौट आते हैं या समय पर क्षेत्रों में पहुंचते ही नहीं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। सभी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगा दिया गया है, और फ्लीपटप्रो व यूएमसी फ्लीट सॉफ्टवेयर के जरिए हर मूवमेंट की निगरानी की जाएगी। वाहन गैराज शाखा से कब निकला, कहां-कहां रुका और कब लौटा हर गतिविधि कमांड सेंटर की स्क्रीन पर दर्ज रहेगी। सुबह से शाम तक कर्मचारी ऑनलाइन रिकॉर्ड रखेंगे। यदि कोई वाहन अपने क्षेत्र में कचरा लेने नहीं पहुंचा तो संबंधित डोर-टू-डोर एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह अन्य सभी सेवा वाहनों की भी डिजिटल ट्रैकिंग होगी। शहर के शौचालयों की दिन में तीन बार मॉनिटरिंग कमांड सेंटर शुरू होने के बाद शहर के सभी शौचालयों की भी डिजिटल निगरानी होगी। फिलहाल संचालकों को दिन में तीन बार सफाई की फोटो भेजनी होती है, लेकिन अब ये फोटो सीधे कमांड सेंटर पर अपलोड होंगी। गंदगी मिलने पर स्वास्थ्य शाखा को तुरंत नोटिस भेजा जाएगा, जिससे कार्रवाई और निगरानी दोनों तेज होंगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद शहर के शौचालयों की सफाई व्यवस्था में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है। गि निगम के सभी सॉफ्टवेयर एक प्लेटफॉर्म पर नगर निगम अब अपने सभी विभागों के सॉफ्टवेयर को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी में है। नए मास्टर-सॉफ्टवेयर में हर विभाग का डेटा एकत्र होगा और आईसीसीसी से ही पूरी व्यवस्था ऑपरेट होगी। इससे सभी कार्यों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और शिकायतों का त्वरित निपटारा संभव होगा।