हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी कर्मचारी की सेवा समाप्ति के मामले में सरकार द्वारा कोई निर्णय नहीं लेने और कोर्ट को स्पष्ट जवाब नहीं देने पर कोर्ट ने डीएलबी डायरेक्टर को तलब किया हैं। जस्टिस अशोक जैन की अदालत ने 8 दिसम्बर को दोपहर 2 बजे डायरेक्टर को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश बर्खास्त कर्मचारी टीकाराम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। दरअसल, अदालत ने 10 अक्टूबर को डीएलबी डायरेक्टर को इस मामले में सरकार के स्तर पर निर्णय लेकर कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा था। लेकिन डीएलबी डायरेक्टर द्वारा इस आदेश की पालना नहीं की गई। बिना जांच और आरोप पत्र के नौकरी से निकाला
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि याचिकाकर्ता टीकम सिंह को साल 2018 में सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया था और साल 2020 में उनकी सेवा की पुष्टि भी कर दी गई थी। साल 2021 में उसे महुआ नगरपालिका में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद साल 2024 में उसके निलंबन आदेश, वेतन रोकने, वार्षिक वेतन वृद्धि (AGI) रोकने और सेवा समाप्ति से जुड़े कई आदेश जारी हुए। लेकिन उसके खिलाफ ना ही कोई जांच की गई, ना उसे आरोप पत्र दिया गया और ना ही कोई जांच अधिकारी नियुक्ति किया गया। जिसने बर्खास्त किया, उस पर एसीबी की जांच
याचिका में कहा गया कि उसे विधिक प्रक्रिया अपनाए बगैर नौकरी से निकाल दिया गया। उसे तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी सुरेन्द्र कुमार मीणा द्वारा मनमाने ढंग से कार्रवाई करते हुए नौकरी से निकाला गया हैं। वहीं, जिस अधिकारी ने यह कार्रवाई की है, उस पर एसीबी की जांच भी चल रही है। याचिकाकर्ता ने भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
