जयपुर महानगर द्वितीय की एसीबी कोर्ट-3 ने करीब 22 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति के मामले में तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. देव कुमार पिंगोलिया को बरी कर दिया हैं। जज तन सिंह चारण ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त करार दिया। एसीबी ने 13 अक्टूबर, 2003 को एफआईआर दर्ज कर 25.90 लाख रुपए की आय से अधिक संपत्तियां अर्जित करने के आरोप में 10 मार्च 2010 को चालान पेश किया था। बिना ठोस सबूतों के आय से अधिक संपत्ति का मामला किया दर्ज एडवोकेट बंशीधर बढ़ाया ने डॉ देव कुमार पिंगोलिया की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि बिना ठोस साक्ष्य के आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। एसीबी ने जानबूझकर संपत्ति के आंकड़े को बढ़ाने के लिए डॉ. पिंगोलिया के परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्तियों को भी शामिल कर लिया था, जो स्वयं डॉक्टर हैं और उनकी अपनी स्वतंत्र आय है। प्रथम जांच अधिकारी ने अपराध नहीं माना
उन्होने बताया कि एसीबी ने 31 मई, 1996 से 15 अक्टूबर, 2003 तक की अवधि में मनमर्जी से 34 लाख 18 हजार 263 रुपए की वैध आय और 60 लाख 9 हजार 219 रुपए अवैध आय मानते हुए आरोपी बनाया था। जिस पर उन्होंने सरकारी सेवा से ही त्यागपत्र दे दिया था। अभियोजन पक्ष आरोपी को दोषी साबित करने में पूरी तरह असफल रहा इस मामले में प्रथम जांच अधिकारी ने भी मामले में कोई अपराध नहीं मानते हुए एफआर देने की सिफारिश की थी। बाद में अन्य जांच अधिकारियों ने अपराध मानते हुए चालान पेश किया था। लेकिन मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी को दोषी साबित करने में पूरी तरह असफल रहा और पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
