‘ड्रोन टीम-4…पुलिस कंट्रोल रूम….अभी-अभी लोहामंडी के पास दो बाइक सवार एक महिला की चेन तोड़कर तेजी से भागते हुए दिख रहे हैं, हमारा ड्रोन इनका पीछा कर रहा है….ओवर’ ‘कंट्रोल रूम….ड्रोन टीम-4….थाने को अलर्ट कर दिया है, जल्द ही पुलिस पहुंच रही है…ओवर’ ये अमेरिका या यूरोप के किसी शहर की पुलिस नहीं, जयपुर पुलिस है, जो राजस्थान में पहली बार क्राइम कंट्रोल के लिए ड्रोन का उपयोग कर रही है। ड्रोन की मदद से पुलिस शहर में आतंक मचाने वाले चेन स्नेचरों से लेकर अवैध नशा बेचने कई बदमाशों को दबोच चुकी है। बड़ी-बड़ी रैलियों-जुलूस, धरने-प्रदर्शनों में संदिग्ध लोगों पर नजर रख रही है। कहीं भी ट्रैफिक जाम लगता है, तो जल्द खुलवाने में भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के ये ड्रोन HD कैमरों से लेस हैं और भागते हुए बदमाशों या गाड़ियों का पीछा करने में भी सक्षम हैं। रात के अंधेरे में नजर रख सकते हैं और किसी को भनक तक नहीं लग सकती। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले फेज में जयपुर पुलिस को 8 ड्रोन दिए गए हैं। इन्हें उड़ाने के लिए 8 टीमें बनाई गई हैं। दूसरे फेज में प्रदेश के हर जिलों को ड्रोन दिए जाएंगे। ये ड्रोन कैसे पुलिस के मददगार बन रहे हैं? कैसे इनकी मदद से पुलिस बदमाशों को दबोच रही है और क्राइम कंट्रोल कर रही है? भास्कर टीम ने इसका रियलिटी चेक किया। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए यह रिपोर्ट भास्कर रियलिटी चेक : रात 9 बजे ठेके के बाहर दिखी भीड़, 10 मिनट में पहुंची पुलिस
पुलिस ड्रोन से संदिग्ध गतिविधियों पर कैसे नजर नजर रखती है? क्या संदिग्ध एक्टिविटी पाए जाने पर पुलिस एक्शन भी होता है? इसका रियलिटी चेक करने के लिए भास्कर टीम रात 8.30 बजे शास्त्री नगर थाना क्षेत्र में मौजूद ड्रोन टीम के पास पहुंची। बिक रहा था अवैध शराब
रात के करीब 8.50 बजे का समय था। ड्रोन दूध मंडी के पास पहुंचा। यहां एक दुकान के बाहर बड़ी संख्या में लोग खड़े हुए थे। ड्रोन टीम इंचार्ज ने ड्रोन कैमरे को जूम करके देखा तो पता चला कि यह शराब की दुकान है। यहां अवैध तरीके से शराब बेची जा रही थी। ड्रोन टीम इंचार्ज ने फुटेज के आधार पर तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। साथ ही वायरलेस भी किया। 10 मिनट में पुलिस पहुंची
अभय कमांड सेंटर पर उन फुटेज को LIVE देखने के बाद शास्त्री नगर थाना पुलिस टीम को सूचना दी। करीब 10 मिनट में शास्त्री नगर थाने की पीसीआर मौके पर पहुंची और शराब की दुकान के बाहर खड़े युवकों को वहां से हटाया। युवक को थाने लाई पुलिस
ठेके से शराब बेच रहे युवक को डिटेन कर पुलिस टीम उसे थाने लेकर चली गई। जब तक एक्शन पूरा नहीं हो गया तब तक ड्रोन उस एक्टिविटी को कैप्चर करता रहा। जयपुर पुलिस कैसे 8 ड्रोन से ले रही अपराधियों की खबर? एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर डॉ. राजीव पचार बताते हैं- जयपुर को 8 हाई डेफिनेशन कैमरे से लैस ड्रोन दिए गए हैं। जयपुर के चारों पुलिस जिलों को एक-एक ड्रोन, ट्रैफिक पुलिस को दो और अभय कमांड सेंटर को दो ड्रोन अलॉट हैं। ड्रोन को उड़ाने के लिए 3-3 पुलिसकर्मियों की 8 टीमें बनाई गई हैं। सभी टीमें अभय कमांड सेंटर से कनेक्ट हैं। एक महीने में 27 एफआईआर दर्ज
एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर डॉ. राजीव पचार ने बताया कि ड्रोन की मदद से कई अवैध गतिविधियां पकड़ी जा चुकी हैं। सबसे ज्यादा मामले रात 8 बजे के बाद अवैध तरीके से शराब बिक्री, ओवर स्पीड के पकड़े गए हैं। ड्रोन फुटेज में अवैध बिक्री कैद होने के बाद अशोक नगर, शास्त्री नगर, संजय सर्किल, गलता गेट थाना इलाकों में न केवल कार्रवाई की गई बल्कि अबतक 27 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। पहले फेज में जयपुर सिटी, दूसरे फेज में सभी जिलों को मिलेंगे ड्रोन
जयपुर पुलिस की मानें तो ड्रोन क्राइम कंट्रोल करने में काफी मददगार साबित हुए हैं। जयपुर पुलिस पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले फेज में मिले 8 ड्रोन का इस्तेमाल पिछले महीने से कर रही है। पुलिस मुख्यालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है जयपुर सिटी में ड्रोन इस्तेमाल को रिव्यू किया जा रहा है। इसके बाद हर जिले को ड्रोन दिए जाएंगे। आने वाले समय में क्राइम सीन पर भी ड्रोन वीडियो का उपयोग किया जाएगा। इससे केस की जांच बारीकी से की जा सकेगी। इन मामलों में पुलिस के मददगार बन रहे ड्रोन
दंगा/तनाव/गुटों में झड़प : कई बार दो पक्षों के बीच में विवाद हो जाता है, पथराव होता है, तनाव बढ़ता है या फिर दंगा भड़कने की स्थिति में ड्रोन काफी कारगर साबित होते हैं। पथराव या अशांति फैलाने वालों को पुलिस टीमें ड्रोन की मदद से चिह्नित कर लेती हैं। पिछले कुछ महीनों में परकोटा के कई इलाकों में ड्रोन उड़ाकर पुलिस टीम ने छतों पर रखे हुए पत्थर और कांच की बोतलों को कैद किया था। इसके बाद वहां पुलिस फोर्स भेजकर छतों को खाली करवाया गया। धरना-प्रदर्शन/रैलियों पर नजर : धरना-प्रदर्शन और बड़ी रैलियों में असामाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठा कर माहौल को खराब करने का प्रयास करते हैं। वहां, ड्रोन की मदद से ये लोग आसानी से डिटेन किए जा सकते हैं। अवैध नशा/तस्करी : कई इलाकों में तस्कर खुलेआम नशा बेचते हैं। पुलिस के पहुंचते ही नशे को आसपास के इलाकों में दबा या फेंक देते हैं। इससे नशा बेचने वालों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलता। हाल ही में जयपुर पुलिस ने नशे की पुड़िया बेचने वालों को चिह्नित कर ड्रोन उड़ाए थे। लोग नशा बेचते हुए डिटेक्ट हो गए थे। ट्रैफिक जाम/VIP मूवमेंट : शहर में किसी बड़े इवेंट के दौरान, आम स्थिति में ट्रैफिक जाम के दौरान ड्रोन से सर्विलांस किया जा सकता है कि जाम कहां तक है। इससे ट्रैफिक कंट्रोल में काफी मदद मिलती है। शहर में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान भी ड्रोन से स्थिति पर नजर रखी जाती है। ड्रोन से जिम्मेदार भी हुए अलर्ट : एडिशनल पुलिस कमिश्नर
एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉक्टर राजीव पचार ने बताया कि जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र को हाइटेक और मजबूत बनाया जा रहा है। मुख्य स्थानों पर हाई डेफिनेशन के सीसीटीवी नेटवर्क, ड्रोन कैमरे, एएनपीआर कैमरे (Automatic Number Plate Recognition), ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और मोबाइल यूनिट्स को तैनात किया है। सिटी में ड्रोन के मूवमेंट से डिजिटल मॉनिटरिंग को काफी मदद मिली है। ड्रोन हर एक्टिविटी पर नजर रखते हैं। इससे फील्ड में तैनात पुलिस टीम भी अलर्ट रहती है। फील्ड में खड़े पुलिसकर्मी एक्टिव होकर काम करते हैं। जिम्मेदार भी समझ गए हैं कि उनकी कोई लापरवाही ड्रोन में कैप्चर हुई तो एक्शन हो सकता है। रियल टाइम जानकारी तो एक्शन : स्पेशल कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर (स्पेशल ऑपरेशन) राहुल प्रकाश ने बताया कि हमारी प्राथमिकता शहर में ट्रैफिक अनुशासन और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है। इससे हमें रियल-टाइम में जानकारी मिलती है और कार्रवाई भी तुरंत होती है। भविष्य में इस सिस्टम को और अच्छा किया जाएगा। पब्लिक अगर रियल टाइम पर हमें घटना की जानकारी देती है तो उस समय ड्रोन काफी कारगर रहते हैं। दो केस में मोबाइल स्नेचरों को हमारी ड्रोन टीम के द्वारा पकड़ा गया। हमारे ड्रोन का कैमरा रात और दिन में बेहतर फुटेज और फोटो देता है।

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