सुबोध पब्लिक स्कूल, रामबाग स्थित जन मंगल खेल मंडप में एस एस जैन सुबोध सीनियर सेकेंडरी स्कूल बापू बाजार, एस एस जैन बालिका सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जौहरी बाजार, सुबोध प्ले स्कूल देव नगर और सुबोध पब्लिक स्कूल, रामबाग का सामूहिक वार्षिकोत्सव गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर एस एस जैन सुबोध सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बापू बाजार ने अपनी स्थापना के गौरवपूर्ण 100 वर्ष और सुबोध पब्लिक स्कूल रामबाग ने 40 वर्ष पूरे किए। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘णमोकार मंत्र’ के साथ हुआ। इसके बाद ‘रेट्रो थीम’ पर आधारित एक ऊर्जावान गीत के माध्यम से सभी अतिथियों और आगंतुकों का स्वागत किया गया। ‘शताब्दी गीत’ के ज़रिए सुबोध के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और अनगिनत उपलब्धियों को दर्शाया गया। इस गीत में सुबोध की विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (एस.ओ.जी.) विशाल बंसल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। अपने संबोधन में विशाल बंसल ने विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और एक श्रेष्ठ नागरिक के रूप में देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई डिजिटल मैगजीन ‘स्पिरिटेड सुबोध’ का विमोचन भी किया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘विकसित भारतः सपनों की उड़ान’ के तहत प्राचीन गौरवशाली भारत और आधुनिक भारत की विकास यात्रा की एक तस्वीर प्रस्तुत की गई। स्टूडेंट्स ने ‘शंकरा नृत्य आदि से अनंत’ प्रस्तुति में आदि देव महादेव के अनंत स्वरूप, प्राचीन भारत के ज्ञान, योग, तप, ध्यान और विज्ञान की छवि को दर्शाया गया। ‘वेद- श्रुति से संस्कृति तक’ शीर्षक वाली प्रस्तुति ने वेद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों के महत्व, सभ्यता के जन्म और उसके विस्तार को उजागर किया। छात्र-छात्राओं ने ‘योग- आत्मानुशासन’ नृत्य के माध्यम से भारतीय योग के वैश्विक प्रभाव और इसे जीने की कला, तथा जीवन व सांसों के संतुलन के रूप में प्रस्तुत किया गया। अंतिम प्रस्तुति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ ने ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ के विचार को साकार किया। ‘टेंपल डांस कण-कण में वैभव मंदिर के शंख और घंटियों की मधुर ध्वनि में आत्मा का संगीत सुनाई देता है। यही शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की पहचान है।’ साइंस एंड टेक्नोलॉजी- कल्पना से सृजन भारत के प्राचीन स्वर्णिम युग में ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का अनोखा संगम दिखाई देता है। उसकी एक छवि नृत्य में दिखाई गई। ‘वोकल से लोकल हुनर से महकता भारत’ स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रस्तुति भारत के हुनर और हुनर-बाजों के नाम रही। ‘मेड इन इंडिया आत्मनिर्भर भारत’ आज भारत ने संपूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उसने अपने सपनों को हकीकत में बदला है और विश्व गुरु बनने का अपना संकल्प फिर से दोहराया है। इसी की एक तस्वीर इस नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की गई। शैडो डांस सृजन की सारथी’ इस नृत्य के माध्यम से नारी शक्ति को नमन किया गया। नारी परिवार की धुरी है। ‘लोक नृत्य – हर रंग में एकता का संग’ भारत विविधताओं का देश है लेकिन भारत की आत्मा एक है। अलग अलग धर्म, जाति और संस्कृतियों के बीच भी हम सभी एकता के रंग में संग संग है। ‘अभ्युदय’ देशभक्ति पूर्ण इस प्रस्तुति के माध्यम से देश की मिट्टी को नमन किया गया। सभी भारतवासी अपने देश से प्रेम करते हैं और देशभक्ति का सागर उनके दिलों में उमड़ता है यही भारत का अभ्युदय है।सभी प्रतिभागी विद्यालयों के संयोजकों ने अपने-अपने विद्यालयों का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन पढ़कर विकास यात्रा पर प्रकाश डाला।
