जालोर में 2 साल से अनबन के कारण अलग रह रहे पति- पत्नी ने शनिवार को फिर से एक साथ रहने का फैसला किया। दोनों ने जिला जज के सामने एक- दूसरे को वरमाला निभाई और जीवनभर साथ रहने की कसम खाई। इसके बाद महिला अपने पीहर जाने की बजाय पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हुई। यह नजारा शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के निर्देश पर जालोर कोर्ट में लगी लोक अदालत में दिखाई दिया। 2 साल से अलग रह रहे थे
दरअसल, जिले के सांचौर क्षेत्र निवासी भरत कुमार(31)पुत्र रमेश कुमार जीनगर और उम्मेदाबाद निवासी रिकु कुमारी(29)पुत्री पारसमल की परिजनों की सहमति से 2016 में हिन्दू रीति रिवाज से शादी हुई थी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे विवाद इतना बढ़ा कि 2 साल पहले दोनों ने अलग- अलग रहने का फैसला लिया। पत्नी रिकु कुमारी अपनी दो बच्चियों के साथ अपने पिता पारसमल के पास चली गई और वहीं रहने लगी। परिवार व अन्य लोगों की समझाइश पर भी मामला नहीं सुलझा तो पत्नी रिकु कुमारी ने कोर्ट में दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए मामला दर्ज कराया गया, जो पारिवारिक न्यायालय में लंबित चल रहा था। आज शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में बेंच के अध्यक्ष जिला जज बन्नालाल जाट, सदस्य पैनल अधिवक्ता भंवरलाल सोलंकी ने दोनों पत्नी-पत्नी में समझाइश करवाई। इस दौरान लड़की के वकील महिपाल सिंह भाटी और लड़के पक्ष के वकील भूरसिंह देवकी ने भी पूरा सहयोग किया। सभी की समझाइश पर दोनों पती-पत्नी जीवन भर साथ रहने के लिए सहमत हुए। उसके बाद कोर्ट में जिला जज बन्नालाल जाट के सामने एक दूसरे को माला पहनाई और जीवन भर साथ रहने की कसम खाई। इसके बाद महिला को उसके पति के साथ ससुराल भेज दिया गया। दोनों एक- दूसरे का हाथ पकड़ कर कोर्ट से ससुराल के लिए रवाना हुए। लोक अदालत का हुआ आयोजन
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज बन्नालाल जाट के निर्देशन में जिले भर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया था। इसमें 8 बेंचों का गठन किया गया है। लोक अदालत को लेकर जिला मुख्यालय पर 3 और तालुका मुख्यालयों पर 5 बेंचेज का गठन किया गया है। 11 हजार 65 प्रकरण चिन्हित
राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिले भर में 30 अप्रैल तक कुल 11 हजार 65 प्रकरण चिन्हित किए गए हैं। इनमें कोर्ट में लंबित प्रकरणों में से 3182 और प्री लिटिगेशन के 7 हजार 883 प्रकरण चिन्हित हैं। ये खबर भी पढ़िए…
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