जिलेभर में देव दीपावली का पर्व अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। नागौर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इस अवसर पर शाम ढलते ही मंदिरों की मुंडेर पर श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर रोशनी की, जिससे पूरे क्षेत्र में दीपावली जैसा माहौल बन गया। मंदिरों में विशेष पूजन और श्रृंगार नागौर शहर के प्रमुख मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार किया गया। नया दरवाजा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर, हनुमान बाग मंदिर, नगर सेठ बंशीवाला मंदिर, रक्षकराज मंदिर, शानेश्वर महादेव मंदिर और धनेश्वर महादेव मंदिर में पंडित अरविन्द बोहरा ने शिव परिवार का विशेष पूजन कर मनमोहक श्रृंगार किया। शाम के समय इन सभी मंदिरों में दीपक जलाकर भव्य श्रृंगार किया गया, जिसके बाद महाआरती हुई। आरती में मोहल्ले की महिलाएं, पुरूष व युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसी प्रकार, ब्रह्मपुरी स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भी देव दीपावली के अवसर पर विशेष श्रृंगार कर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिन्होंने पूरे उत्साह के साथ पर्व मनाया। क्यों मनाई जाती है देवताओं की यह दिवाली? देव दीपावली का पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसका सीधा संबंध भगवान शिव से है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक शक्तिशाली राक्षस का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय के उपलक्ष्य में समस्त देवताओं ने काशी (वाराणसी) में दीप जलाकर खुशियाँ मनाई थीं। इसीलिए यह पर्व देवताओं की विजय का प्रतीक माना जाता है और इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन दीपदान करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
