पंजाब के अमृतसर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य भाई मंजीत सिंह जी ने पाकिस्तान सरकार द्वारा गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर गए भारतीय जत्थे में शामिल 14 हिंदू श्रद्धालुओं को वापस भेजने के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल अनुचित है बल्कि गुरु नानक देव जी के सर्वधर्म समभाव के संदेश के भी विपरीत है। मंजीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी केवल सिखों के ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के साझा गुरु हैं। उन्होंने मानवता, समानता और प्रेम का संदेश दिया। गुरु साहिब का उपदेश किरत करो, नाम जपो, वंड छको, किसी एक मजहब या जात तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। हर इंसान पहले मनुष्य, बाद में धर्म से जुड़ा- SGPC SGPC सदस्य ने आगे कहा कि गुरु नानक देव जी ने अपने उपदेशों में सभी वर्गों और जातियों को समान दर्जा दिया। हर इंसान पहले मनुष्य होता है, बाद में हिंदू, सिख या मुसलमान। इसलिए किसी भी धर्म के श्रद्धालुओं को ननकाना साहिब के दर्शन से वंचित करना गलत है। मंजीत सिंह ने यह भी कहा कि अगर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता थी, तो पाकिस्तान सरकार का दायित्व था कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे, न कि उन्हें वापस भेज दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ननकाना साहिब की पवित्र धरती सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है, और वहां हर किसी को दर्शन का अधिकार होना चाहिए। दोनों देशों से अपील मंजीत ने दोनों देशों की सरकारों से अपील की कि वे गुरु नानक देव जी के विश्व भाईचारे और मानवता के संदेश को समझें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में हर धर्म, हर जात और हर देश के श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के ननकाना साहिब के दर्शन कर सकें।