राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- आपने ये भी सुना होगा, ये भी पढ़ा होगा, कि क्रिकेट में पाकिस्तान जीत जाए तो इधर पटाखे फूटते हैं। क्यों फूटते पटाखे? ये राष्ट्र की संकल्पना में नहीं होना चाहिए। बागड़े ने कहा- देश के नागरिक को देश के मानव बिंदुओं का आदर करना चाहिए। एक देश का खाना और दूसरों देश का गाना, वो देश का नागरिक सच्चा नागरिक नहीं बन सकता। बागड़े ने अपने उद्बोधन में कहा- मैंने पेपर में पढ़ा है, माननीय सोनिया जी गांधी ने कई सालों तक नागरिकता ली नहीं। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम डाल दिया। ये भी आप पढ़े होंगे। राज्यपाल बांसवाड़ा की गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय और वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ हिन्दू एकेडमीशियंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय एकात्मता: विविधता में एक चेतना विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के पहुंचे थे। बोले- इजराइल किसी से डरता नहीं राज्यपाल हरिभाऊ बागडे में अपने संबोधन में कहा- इजराइल ने इच्छा शक्ति से अपने देश का निर्माण किया है। उनका सपना था, उनका ध्येय था और उनकी दृष्टि थी। उनका आत्म-विश्वास था कि कभी न कभी हम हमारा देश निर्माण करेंगे और उन्होंने उनका देश निर्माण किया। आज इजराइल का नाम सारे दुनिया में लिया जाता है। इसके तीनों तीनों बाजू (तरफ) शत्रु राष्ट्र हैं। एक तरफ समुद्र है। लेकिन डरते नहीं। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे में अपने संबोधन में कहा- भारत का गौरवशाली इतिहास और इसकी अनूठी संस्कृति हमेशा अक्षुण्ण रहेगी, उसे कोई भी मिटा नहीं सकता। कई लोग नागरिकता नहीं लेते बागडे ने कहा- किसी राष्ट्र में रहने के महीने 2 महीने तो रह सकते हैं लेकिन 6 महीने बाद उसकी नागरिकता लेनी पड़ती है। लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो नागरिकता नहीं लेते। मैंने पेपर में पढ़ा है सोनिया गांधी ने कई सालों तक नागरिकता नहीं ली। ये अच्छा नहीं है। बागड़े ने भारत-पाक विभाजन के समय की बात भी बताई। उन्होंने कहा- लोगों से कहा गया कि जिसे यहां रहना है वह यहां रहे जाना है चला जाए। जिन लोगों ने जाने के लिए बिस्तर बांध लिए थे, उन्होंने सामान अंदर रख लिया और यही रह गए। वहां से भी कई लोग भारत में आए। धर्म पर आंख उठा कर कोई देखेगा तो बर्दाश्त नहीं करेंगे बागडे ने भाषण में कहा- राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा इतिहास, हमारी संस्कृति इतनी मजबूत है कि कोई इसे मिटा नहीं सकता। उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत पर गर्व करने और इसे बचाने का आह्वान किया। न्होंने प्रकृति और जीवन के प्रति भारतीय आदर भाव को समझाया। उन्होंने कहा कि वृक्ष जलाता नहीं है, वह हमें ऑक्सीजन देता है, इसलिए हमने उसकी पूजा करने की परंपरा शुरू की। उन्होंने ‘धर्म’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि हर नागरिक का अपना कर्तव्य है। उन्होंने बल दिया कि भविष्य का भारत कर्तव्य, मूल्य और मजबूत सांस्कृतिक नींव पर ही टिका होगा। हमारे धर्म पर कोई आंख उठाकर देखेगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे, धर्मान्तरण बिल से अच्छा कानून बनाया है।
