सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर तिलक लगाने और मूर्तिपूजा के विरोध का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया। आक्रोश को देखते हुए प्रिंसिपल को स्कूल से हटा दिया गया। मामले की जांच पूरी होने तक सीबीईओ कार्यालय में उपस्थिति देने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, प्रिंसिपल का कहना है कि बच्चों को कबीर का पाठ पढ़ाया गया था, जिसे विस्तार से समझाया गया था। मामला सिरोही जिले के रेवदर ब्लॉक स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पेरवा का है। घटना मंगलवार दोपहर की है। शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति शांत हुई। फिलहाल, आगे कार्रवाई की मांग करते हुए लोगों ने स्कूल पर ताला लगाकर विरोध करने की चेतावनी दी है। CDEO ने प्रिंसिपल को स्कूल से हटाया जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों और हिंदू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन की सूचना के बाद एसीबीईओ व कार्यवाहक CBEO घनश्याम सिंह आढा, गमनाराम कोली सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। कक्षाओं में जाकर छात्रों से बातचीत की। वहीं ग्रामीणों और अभिभावकों की शिकायतें सुनीं। अधिकारियों ने लोगों को शांत करने की कोशिश की। इस दौरान मौके से ही फोन पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी मृदुला व्यास को अवगत कराया। CDEO के निर्देश पर प्रधानाचार्य पेपसिंह मीणा को तत्काल प्रभाव से विद्यालय से हटाकर सीबीईओ कार्यालय में उपस्थिति देने के आदेश जारी किए गए हैं। जांच पूरी होने और आगे के आदेश तक वे वहीं रिपोर्ट करेंगे। छात्राएं प्रतियोगिता में हारी तो अभद्र व्यवहार किया विहिप के रणछोड़ पुरोहित ने बताया- प्रधानाचार्य पेपसिंह मीणा ने छात्रों को तिलक लगाने और मूर्तिपूजा करने से मना किया। महादेव व माताजी की पूजा को व्यर्थ बताया। हाल ही में जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में छात्रा टीम को बिना स्टाफ भेजा गया और हारने पर छात्रों का मनोबल बढ़ाने के बजाय अभद्र व्यवहार किया। स्टाफ के तालमेल नहीं होने से स्कूल पर प्रभाव पड़ रहा है। छात्र बोले-दो महीने से लगातार दबाव बना रहे छात्रों ने बताया- प्रिंसिपल अक्सर कहते हैं कि भगवान कुछ नहीं होते और रामायण-महाभारत का कोई अर्थ नहीं है। पत्थरों की पूजा से क्या होगा, भगवान होते तो खुद आ जाते। प्रार्थना सभा के दौरान भी छात्रों को तिलक लगाकर नहीं आने की हिदायत दी जाती है। पिछले दो महीने से लगातार परेशान किया जा रहा है। प्रधानाचार्य ने कहा – राजनीति से प्रेरित है विरोध प्रधानाचार्य पेपसिंह मीणा ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि न तो किसी बच्चे के साथ गलत व्यवहार किया गया और न ही तिलक लगाने से मना किया गया। धर्म से संबंधित कोई बात अब तक बच्चों से नहीं की है। मैं स्वयं हिन्दू हूं। राजनीति से प्रेरित कुछ लोग मुझे यहां से हटवाना चाहते हैं। इसमें कुछ स्टाफ भी मिला हुआ है, जिन्होंने बच्चों को इसके लिए प्रेरित किया है। बच्चों को कोई उकसाएगा तो वे ऐसी बातें कह सकते हैं। यह 11वीं-12वीं कक्षा के छात्र हैं, समझदार हैं। छात्राओं की टीम के साथ पुरुष स्टाफ भेजने से संबंधित मामले पर प्रधानाचार्य ने कहा कि उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। इस संबंध में पीईईओ को भी अवगत कराया गया था और करोटी स्कूल से महिला शिक्षिका को साथ भेजने की व्यवस्था की गई थी। वह टीम के रवाना होने के समय पहुंची या बाद में, इसकी मुझे सटीक जानकारी नहीं है। कार्रवाई की मांग को लेकर दी चेतावनी मामले के संबंध में लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर प्रिंसिपल को स्कूल से नहीं हटाया गया तो गेट पर ताला जड़कर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। कार्रवाई को लेकर शिक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह आढा को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान विहिप के रणछोड़ पुरोहित, नरेन्द्र बंजारा, सागरमल सोनी, छगनलाल माली, अशोक माली, बलवंत देवासी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। पहले भी लग चुके हैं आरोप आबूरोड नगरपालिका उपाध्यक्ष रवि शर्मा ने बताया-राउमावि सांतपुर (आबूरोड) में भी पेपसिंह पर ऐसे आरोप पहले भी लग चुके हैं। करीब दो साल पहले छात्रों को तिलक लगाने से रोकने और हाथ में धागा नहीं बांधने को लेकर हिंदू संगठनों व अभिभावकों ने स्कूल में पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था। अब एक बार फिर छात्रों को तिलक लगाने से रोकने और मूर्तिपूजा न करने के लिए भड़काने के आरोप सामने आए हैं।