60 बीघा में मूंग और 20 बीघा में तिल की बुवाई की थी। सोचा था फसल आने पर जो इनकम होगी, उससे बेटी पूजा और निर्मला की शादी करूंगा, लेकिन ज्यादा बरसात होने से खेतों में पानी भर गया। सारी फसल खराब हो गई। अब बेटियों की शादी फिलहाल टालनी पड़ रही हैं। यह दर्द है किसान कूपाराम का। यह पीड़ा सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि पाली में ऐसे सैकड़ों किसान है, जिनके सपने बारिश ने धो दिए हैं। फसल खराब होने के कारण गुड़ सोनगिरा गांव के किसान कपूराराम को भी अपने बेटे रमेश की शादी टालनी पड़ गई हैं। किसानों का कहना है कि वे अच्छी बरसात की दुआ करते हैं, लेकिन इस बार पाली में औसत से ज्यादा बरसात होने से हमारे सपने बरसात के साथ बह गए हैं। खेत बरसाती पानी से भरने से फसल खराब हो गई। मुआवजा लेने के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे है, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी आश्वासन देकर किसानों को वापस घर भेजा रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… किसान बोले- फसल से लाखों की इनकम की उम्मीद थी, लेकिन अब कर्जे में डूबे
किसानों का कहना है, जिस फसल से लाखों रुपए की इनकम होने की उम्मीद थी। आज स्थिति यह है कि वह फसल जल चुकी है और कई किसान कर्जे में है। किसी को बेटी की शादी टालनी पड़ी तो किसी को बेटे को इंजीनियर बनाने की ट्यूशन फीस भरने में परेशानी हो रही है। क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत करवाने तक सपना बरसाती पानी में बह गया। पीड़ित किसान सरकार से फसल बीमा का मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उसमें हो रही देरी किसानों के घावों पर मरहम की जगह नमक लगाने का काम कर रही हैं। 30 बीघा में फसल खराब, बेटे की कोचिंग फीस भरने में भी दिक्कत
जेतपुरा गांव के रहने वाले किसान खेताराम ने बताया- उसने 30 बीघा में मूंग की फसल बुवाई की थी, लेकिन अधिक बरसात होने से उनके खेत में पानी भर गया। इससे सारी फसल खराब हो गई। ऐसे में कोटा में इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहे बेटे लक्षित और 12वीं में पढ़ रही बेटी तेजस्वी की फीस भरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मकान की छत तक सही नहीं करवा पाऊंगा
पाली जिले के सोजत क्षेत्र के संडाणा गांव (गागुड़ा) निवासी किसान महेन्द्र सिंह बताते है- 2 हेक्टेयर में फसल की बुवाई की थी। बरसात से पूरी फसल चौपट हो गई। सोचा था कि फसल से जो रुपए आएंगे, उससे मकान की क्षतिग्रस्त छत सही करवाऊंगा, लेकिन फसल खराब होने से यह सपना अधूरा ही रहेगा। पाली जिले के 51.39 प्रतिशत फसल खराब
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) रमेशचंद्र आमेटा ने कहा कि पाली जिले में इस बार खरीफ की बुवाई 3 लाख 90 हजार 22 हेक्टेयर में हुई। इसमें नुकसान 2 लाख 452 हेक्टेयर (51.39 प्रतिशत) में होना सामने आया है। राजस्व विभाग ने सर्वे करवा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है, जिससे किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई शुरू की जा सके। बता दें कि पाली जिले में खरीफ की फसल में मुख्यत ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, ग्वार, मूंग,मोठ, उड़द, चावल की बुवाई की जाती हैं।