जैसलमेर. स्वर्णनगरी की पर्यटन अर्थव्यवस्था को अक्सर होटल, रिसॉर्ट और डेजर्ट कैंप के कारोबार से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी असली हलचल शहर के उन छोटे प्रतिष्ठानों में भी दिखाई देती है, जिनकी रोजमर्रा की बिक्री पर्यटकों की आवाजाही के साथ बदलती है। चाय की दुकान, नाश्ते का ठेला, स्थानीय हस्तशिल्प, कपड़ों की दुकान, स्मृति चिह्न बेचने वाले प्रतिष्ठान और छोटे रेस्टोरेंट इस आर्थिक गतिविधि की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पर्यटकों की आमद बढ़ने पर इन दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या और खरीदारी का स्वरूप बदलता है। सीजन की रौनक के साथ कारोबार की यह निर्भरता भी सामने आती है।जैसलमेर आने वाला पर्यटक केवल होटल में ठहरने या दर्शनीय स्थल देखने तक सीमित नहीं रहता। यात्रा के दौरान चाय-नाश्ता, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प और यादगार वस्तुओं की खरीदारी भी उसके खर्च का हिस्सा बनती है। यही खर्च छोटे कारोबारियों तक पहुंचने वाला आर्थिक प्रवाह तैयार करता है।हालांकि, इस प्रवाह का लाभ सभी दुकानदारों को समान रूप से मिलता है या नहीं, इसका आकलन स्थानीय बाजारों की वास्तविक बिक्री, ग्राहकों की संख्या और कारोबार के प्रकार के आधार पर ही किया जा सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ना और छोटे दुकानदारों की कमाई बढ़ना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। इनके बीच की कड़ी समझना पर्यटन अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए जरूरी है।
