कपूरथला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरमीत टिवाना की अदालत ने सीनियर कॉन्स्टेबल अमनदीप सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। अमनदीप सिंह कपूरथला के पुलिस अधीक्षक (जांच) के कार्यालय में नायब रीडर के पद पर तैनात हैं। उन पर जमीन कब्जे और धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कथित तौर पर 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। इस मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 5 अक्टूबर 2026 को जालंधर रेंज के विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत FIR नंबर 22 दर्ज की थी। कनाडा भेजने के नाम पर ठगी और रिश्वत की मांग का आरोप अभियोजन पक्ष की शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता और सुरजीत सिंह नाम के व्यक्ति के बीच पैसों का विवाद चल रहा था। आरोप है कि सुरजीत सिंह ने शिकायतकर्ता से कनाडा भेजने के नाम पर 12 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। जब शिकायतकर्ता को एसपी (जांच) दफ्तर बुलाया गया, तो कथित तौर पर रीडर सुखदेव सिंह ने उससे FIR से बचने के लिए पैसों का इंतजाम करने को कहा और बाद में उसे नायब रीडर अमनदीप सिंह से मिलने की हिदायत दी। शिकायतकर्ता का दावा है कि अमनदीप सिंह ने उससे 2 लाख रुपये मांगे, जिसके बाद उसने रिश्वत मांगने की पूरी बातचीत अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली। अदालत में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच और पूरे मामले की निष्पक्ष तफ्तीश के लिए आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत, बचाव पक्ष के वकील ने रिश्वत के सभी आरोपों को खारिज करते हुए सुरजीत सिंह के एक हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें शिकायतकर्ता पर 2 लाख रुपये का बकाया होना बताया गया था। बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और गवाही के दौरान पक्षद्रोही घोषित होने का मुद्दा उठाकर उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं, जांच में सहयोग का आदेश माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने टिप्पणी की कि मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग को देखते हुए इस चरण में आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती है। अदालत ने आरोपी को जांच में पूरी तरह सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है; मामले की कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी।
