काफी समय से डायबिटीज से जूझ रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई। हीमोग्लोबिन कम होने के कारण उन्हें ब्लड चढ़ाना था, लेकिन नहीं चढ़ पाया। क्योंकि उनका बॉम्बे ब्लड ग्रुप था। ऐसा रेयर ब्लड ग्रुप जो 10 लाख में से किसी 1 का होता है। हालांकि मरीज की बेटी का वही ब्लड ग्रुप था, लेकिन एक यूनिट के बाद वह दोबारा डोनेट नहीं कर पाई, जबकि जरूरत ज्यादा यूनिट की थी। जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मंगलवार की रात मरीज ने दम तोड़ दिया। आखिर क्या होता है बॉम्बे ब्लड ग्रुप? नॉर्मल ब्लड ग्रुप से कितना अलग होता है? सबसे पहले कब इस ब्लड ग्रुप का पता चला? राजस्थान में इस ब्लड ग्रुप के कितने लोग हैं? अगर समय पर यह खून न मिले तो? इम्यूनोहेमेटोलॉजिस्ट डॉ.राम मोहन जायसवाल से जाने ऐसे कई सवालों के जवाब… सवाल 1 : बॉम्बे ब्लड ग्रुप क्या होता है? जवाब : इंसान के खून में एक खास प्रोटीन (जिसे H एंटीजन कहते हैं) होता है। इसी से तय होता है कि ब्लड ग्रुप A, B या O क्या होगा। कुछ लोगों में यह H एंटीजन बिल्कुल नहीं होता। उनके ब्लड ग्रुप को बॉम्बे ब्लड ग्रुप कहा जाता है। खास बात यह है कि लैब के नॉर्मल टेस्ट में यह ब्लड बिल्कुल O ग्रुप जैसा ही दिखाई देता है। आम जांच में इसका पता नहीं चल पाता। सवाल ​2 : दुनिया में कुल कितने तरह के ब्लड ग्रुप होते हैं? ​जवाब : मेडिकल साइंस में खोज के आधार पर ब्लड के अब तक दुनियाभर में कुल 49 तरह के सिस्टम सामने आए हैं। इनमें कई तरह की वैरायटी भी होती हैं। इम्यूनोहेमेटोलॉजिस्ट डॉ.राम मोहन जायसवाल ने बताया कि 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम का इसी साल पता चला है। जिसका नाम जामा रखा गया है। आम बोलचाल में मुख्य रूप से 8 तरह के ब्लड ग्रुप मानते हैं। A पॉजिटिव, A निगेटिव, B पॉजिटिव, B निगेटिव, AB पॉजिटिव, AB निगेटिव, O पॉजिटिव और O निगेटिव। सवाल 3 : बॉम्बे ब्लड ग्रुप का सबसे पहले कब पता चला? ​जवाब : इस रेयर ब्लड ग्रुप की खोज साल 1952 में महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई (तब बॉम्बे) में हुई थी। इसकी खोज डॉ.वाई.एम. भेंडे ने की थी। चूंकि यह पहली बार बॉम्बे में मिला था, इसलिए इसका नाम बॉम्बे ब्लड ग्रुप रख दिया गया। सवाल ​4 : बॉम्बे ब्लड ग्रुप कितने लोगों में पाया जाता है ? ​जवाब : ये रेयर ब्लड ग्रुप है। ​दुनियाभर में करीब दस लाख लोगों में से सिर्फ 1 में ये ब्लड ग्रुप पाया जाता है। सवाल ​5 : राजस्थान में इस ब्लड ग्रुप के कितने लोग हैं? जवाब : राजस्थान में इस ब्लड ग्रुप के कितने लोग हैं, इसका कोई डेटा नहीं है। हालांकि एक जर्नल के मुताबिक नॉर्थ इंडिया में 30 हजार लोगों में ये ब्लड ग्रुप है। हालांकि, देश-भर के बड़े ब्लड बैंकों के पास ऐसे गिने-चुने डोनर्स की एक छोटी सी लिस्ट जरूर होती है। सवाल 6 : इस ब्लड ग्रुप के बारे में कैसे पता चलता है? जवाब : जब कभी किसी मरीज को ब्लड की जरुरत होती है, तो तब ब्लड बैंकों द्वारा ब्लड ग्रुप का टेस्ट किया जाता है। ब्लड बैंकों में एंटी एच लेक्टिन और सलाइवा से कंफर्म किया जाता है। सवाल ​7 : अगर समय पर यह खून न मिले तो? जवाब : यह सबसे बड़ा रिस्क है। बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले पेशेंट को सामान्य ब्लड नहीं चढ़ाया जा सकता। अगर गलती से भी दूसरा खून चढ़ा दिया जाए तो शरीर की नसें ब्लॉक होने लगती हैं। किडनी समेत अन्य अंग खराब हो सकते हैं। जान का भी खतरा होता है। स्वास्थ्य विभाग में ब्लड सेफ्टी के डिप्टी डायरेक्टर केसरी सिंह ने बताया कि O पॉजिटिव वालों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव ही या बॉम्बे ब्लड ग्रुप। इसके अलावा सभी ब्लड बैंक को भी डोनर्स के रेअर ब्लड ग्रुप्स का रजिस्टर मेंटेन करना चाहिए, ताकि इमरजेंसी में ऐसे मरीजों की मदद की जा सके। सवाल 8 : इस ब्लड ग्रुप का टेस्ट कैसे किया जाता है? जवाब : इसके लिए खून की सामान्य जांच के अलावा एक खास किस्म के लिक्विड का इस्तेमाल कर लैब में स्पेशल जांच की जाती है। इससे कंफर्म होता है कि ब्लड में H एंटीजन है या नहीं। आम तौर पर ह्यूमन ब्लड में H एंटीजन पाया जाता है, जिसके आधार पर A,B या O ब्लड ग्रुप तय होते हैं। बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले लोगों के खून में H एंटीजन ही नहीं होता।