पंजाब के मोगा में 2011 में हुई बस आगजनी के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के 9 अनुयायियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इन पर पेप्सू की बस में आग लगाने और फायरिंग करने के आरोप थे। इस मामले में पहले पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था और बाद में जांच के दौरान डेरा अनुयायियों को आरोपी बनाया गया। मामला 2015 में पंजाब में हुई बेअदबी की घटनाओं की जांच के दौरान भी चर्चा में आया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस की सुनवाई चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर की गई थी। बरी होने वालों में सुखजिंदर सिंह उर्फ सन्नी, शक्ति सिंह, बलजीत सिंह, रंजीत सिंह भोला, निशान सिंह, रनदीप सिंह उर्फ नीला, नरिंदर कुमार शर्मा, संदीप सिंह और पृथ्वी सिंह शामिल हैं। इस मामले के 2 अन्य आरोपियों मोहिंदर पाल उर्फ बिट्टू और प्रदीप कुमार की मौत हो चुकी है। बिट्टू की जेल में मौत हुई थी, जबकि प्रदीप कुमार की दिनदहाड़े गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। पहले पुलिस ने पेश की थी अनट्रेस रिपोर्ट पुलिस ने वर्ष 2011 में मोगा में पेप्सू की बस को आग लगाने और फायरिंग करने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उस समय आरोप था कि डेरा सच्चा सौदा के 200 से 300 अनुयायी मोगा में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने किसी का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया था। बाद में अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट भी पेश कर दी गई थी। जून 2018 में पुलिस ने मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद केस की जांच और आरोपियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे। बचाव पक्ष के वकील अमर डी. कामरा ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किलों को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। बचाव पक्ष ने बेअदबी मामलों की जांच से जोड़ा बचाव पक्ष के वकील अमर डी. कामरा ने अदालत में दलील दी कि वर्ष 2015 में पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने पुराने बस आगजनी मामले का इस्तेमाल उन घटनाओं की जांच को आगे बढ़ाने के लिए किया। वकील के अनुसार, पुलिस ने जून 2018 में बेअदबी के मामलों में मोहिंदर पाल उर्फ बिट्टू को गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिट्टू को प्रताड़ित कर उससे कबूलनामा लिया और उसके आधार पर अन्य लोगों को भी इस मामले में आरोपी बना दिया। बचाव पक्ष का कहना था कि इन लोगों का बस आगजनी की घटना से कोई संबंध नहीं था। अदालत ने अब इस मामले में नौ अनुयायियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। धार्मिक समागम के विरोध से बढ़ा तनाव वर्ष 2011 में मोगा क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने धार्मिक समागम आयोजित करने का प्रयास किया था। स्थानीय सिख संगठनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। इस विरोध के कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। इस दौरान डेरा समर्थकों के टेंट और कुछ मोटरसाइकिलों में आग लगाए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। हालात बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग तथा लाठीचार्ज किया। 2015 बेअदबी घटनाओं के बाद चर्चा में आया मामला वर्ष 2015 में बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के बाद पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इन मामलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। इसी दौरान वर्ष 2011 का बस आगजनी मामला भी फिर चर्चा में आया। बाद में इस केस की जांच और सुनवाई को लेकर घटनाक्रम आगे बढ़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला चंडीगढ़ ट्रांसफर किया गया। अब जिला अदालत ने 9 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।