चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में पंजाब और हरियाणा से शिक्षकों की भर्ती का मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) पहुंच गया है। जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स, यूटी चंडीगढ़ ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है। कमेटी ने लंबे समय से डेपुटेशन पर चंडीगढ़ में तैनात शिक्षकों को उनके मूल राज्यों में वापस भेजने की मांग भी की है। कैट ने फिलहाल भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित कर्मचारियों की नियुक्तियां याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। कैट ने यूटी प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। प्रिंसिपल-टीजीटी शिक्षकों के पैनल को चुनौती कमेटी ने 30 जुलाई 2026 को जारी उस पत्र को चुनौती दी है, जिसके तहत पंजाब और हरियाणा से विभिन्न पदों पर शिक्षकों के पैनल मांगे गए थे। इनमें प्रिंसिपल, हेडमास्टर-हेडमिस्ट्रेस, लेक्चरर (पीजीटी) और मास्टर-मिस्ट्रेस (टीजीटी) के पद शामिल हैं। याचिका में डेपुटेशन के कोटे से संबंधित अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है। कमेटी का कहना है कि चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया में यूटी कैडर के योग्य कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। यूटी कैडर को पदोन्नति में प्राथमिकता देने की मांग याचिकाकर्ता कमेटी के अनुसार, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में पहले से काम कर रहे यूटी कैडर के योग्य शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर दिए जाने पर विचार होना चाहिए। कमेटी का कहना है कि दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर शिक्षकों को बुलाने के कारण यूटी कैडर के कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। कमेटी ने यह मांग भी की है कि डेपुटेशन की निर्धारित अवधि पूरी कर चुके शिक्षकों को उनके मूल राज्यों में वापस भेजा जाए। शिक्षक 10 से 20 साल से तैनात याचिका के अनुसार प्रशासन के निर्देशों में डेपुटेशन पर तैनाती की अधिकतम अवधि तीन साल निर्धारित है। इसके बावजूद कुछ लेक्चरर, टीजीटी और जेबीटी शिक्षक 10 से 20 साल या इससे भी अधिक समय से चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं। कमेटी ने इसी आधार पर लंबे समय से डेपुटेशन पर तैनात कर्मचारियों को वापस भेजने और भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। फिलहाल कैट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए प्रशासन से जवाब मांगा है। मामले का अंतिम फैसला सुनवाई के बाद होगा।
