नमस्कार, नेताजी के कूच के दौरान आया कलेक्टर महोदया का कॉल चर्चा में है। पूनियाजी ने कैरमबोर्ड पर खूब ‘मास्टरस्ट्रोक’ दिखाए। जयपुर में कोचिंग थप्पड़कांड हुआ तो लोग उबल पड़े और जोधपुर में दीपावली के सीजन को देखते हुए चुनाव की तारीख टालने की मांग हो गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कलेक्टर साहिबा का ‘फोन’ आया हाल ही नेताजी ने तर्जनी उठाकर भीष्म की सी प्रतिज्ञा की थी। कहा था- मैं पंचायत के चुनाव लड़ने के लिए पैदा नहीं हुआ। जाहिर है कि उनकी नजर उस बड़े चुनाव पर है जिसे लड़कर वे हार चुके, लेकिन जन सहयोग मिलने से मनोबल खूब बढ़ गया। विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं रहे। इतना समय रहा है कि नेता लोग अपनी लोक-लुभावन छवि बना सकें और चुनाव आने तक कद बढ़ा लें। जेल से छूटते ही नेताजी एक्टिव हो गए। बड़े-बड़े नेताओं पर छोटे-छोटे आरोप लगाकर चर्चाओं में आ गए। फिर बारां की धरती पर पहुंच गए और खाद को मुद्दा बनाते हुए आमरण अनशन पर बैठ गए। धरने पर पहुंचे तो थे थार पर खड़े होकर, लेकिन बारां से जब राजधानी कूच का ऐलान किया तो एक रेहड़ी पर गद्दे डालकर उसी को मंच बना लिया। जन सहयोग से रेहड़ी को ठेलकर प्रतीकात्मक कूच निकाला गया। कूच के दौरान कारवां टोंक की तरफ बढ़ा इस दौरान नेताजी के मोबाइल पर जिला कलेक्टर महोदया का कॉल आ गया। गुड मॉर्निंग हुई। हाल-चाल पूछा गया। फिर जिले में खाद के स्टॉक का ब्योरा दिया जाने लगा। कलेक्टर महोदया बोलीं- लोगों में कन्फ्यूजन है कि टोंक में खाद की किल्लत है। वो तो खरीफ का बचा हुआ खाद है। डिमांड के अनुसार खाद तो आने लग गया है। नेताजी ने ‘यही तो बीमारी है’ जैसा जवाब देते हुए दस्तावेजी सवाल उठाए। मैडम ने आज्ञा सी मांगी- आप फरमाएं तो एसडीएम-तहसीलदार को चेकिंग के लिए भेज दूं? नेताजी न मंत्री हैं न विधायक, न सरकार में किसी पोजीशन पर हैं। उनके लिए कलेक्टर की कोई जवाबदेही नहीं। संभव है हालात भांपकर बात की हो। फिलहाल बारां में नेताजी के मित्र पूर्व मंत्री जी ने धरने के मंच से कहा था- ये कलेक्टर एसपी कौन हैं? जनता के नौकर ही तो हैं। 2. पूनियाजी का गला भर आया एक समय था जब पूनिया जी को लग रहा था कि राजनीतिक जीवन में ‘डाउनफॉल’ आ गया है। विधानसभा चुनाव हार गए। संगठन के मुखिया का पद छूट गया। तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और हरियाणा के प्रभारी का जिम्मा संभाला। धीरे-धीरे सितारे बदलने लगे। बंगाल के चुनाव में भी वे पर्दे के पीछे भूमिका निभाते रहे और फतेह में बड़ी भूमिका निभाई। उनका कद बढ़ गया। सितारे बुलंदी पर पहुंच गए। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाकर संसद में भेज दिया। इसके बाद पंजाब का मुख्य प्रभारी बना दिया गया और जम्मू कश्मीर का सह प्रभारी बनाया गया। संगठन में अब सतीश पूनिया बड़ा नाम बन चुके हैं। हरियाणा का प्रभारी रहते हुए वे जिस दौर से गुजर रहे थे, उसी में उन्होंने हार न मानने का जज्बा विकसित किया और उनके कई मास्टरस्ट्रोक सामने आए। हाल ही हरियाणा भाजपा संगठन की ओर से उन्हें विदाई दी गई। समारोह में साथियों को संबोधित करते हुए पूनियाजी का गला भर आया। बोले- मैं और मेरा परिवार जीवनभर हरियाणा का आभारी रहेगा। अब उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वे इत्मीनान से कैरम खेल रहे हैं। स्ट्राइकर से गोटियों पर सटीक निशाना लगाकर गोले में पहुंचा रहे हैं। हरियाणा खेल-भूमि है। राजनीति के खेल में अब तक सीखे गुर पंजाब और जम्मू कश्मीर में खूब काम आएंगे। 3. थप्पड़ कांड के बाद ‘मांग लिया बलिदान’ भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम साहब मानते थे कि एक टीचर को जलती हुई मोमबत्ती की तरह होना चाहिए। जो खुद जलकर बच्चों का दिमाग रोशन करे। उनका कहना था कि कक्षा में ऐसा माहौल होना चाहिए जिससे बच्चों में रचनात्मकता बढ़े। मारपीट-हिंसा से उनमें डर पैदा होगा। ऐसे में उनके विकास पर विपरीत असर पड़ेगा। कलाम साहब के ऐसे ही विचारों से प्रभावित होकर जयपुर में एक कोचिंग संस्थान की स्थापना की गई। लेकिन कभी-कभी होता ऐसा है कि जिनका नाम शांतिलाल रखा गया था वे बात-बात पर क्रोध की मूर्ति बने नजर आते हैं। उस दिन क्लास में एक पर्ची चर्चा का विषय बन गई। पर्ची पर लिखा था- कलाम आपका बलिदान मांगता है। हालांकि इस पंक्ति के भावार्थ में अनंत संभावनाएं निहीत हैं। पढ़ने वाला इसे पढ़कर अपनी सहूलियत से अपना अर्थ पैदा कर सकता है। लेकिन कक्षा को कोच कर रहे टीचर ने पता नहीं इस ध्येय वाक्य का क्या अर्थ निकाला और जिस लड़के के पास यह पर्ची पाई गई, उसे आगे बुलाकर उस पर थप्पड़ों की बरसात कर दी। कुल मिलाकर कलाम साहब के नाम पर चल रही कोचिंग में कलाम साहब के सपनों और विचारों पर मिसाइल दाग दी गई। थप्पड़ की गूंज दूर तक सुनाई दी। इसे मनोज मीणा नाम के आंदोलनकारी ने भी सुन लिया। जिसे कोचिंग के खिलाफ प्रदर्शन करने का पूर्व अनुभव था। उसने सोशल मीडिया पर अपील कर लोगों को बुला लिया। लोग जुटकर हंगामा करने लगे। पुलिस ने डंडे के जोर से उन्हें खदेड़ दिया। आरोपी टीचर फरार हो गया। संचालक ने कार पर चढ़कर भीड़ से माफी मांग ली। कुल मिलाकर आरोपी टीचर के साथ वही हो जो उस पर्ची पर लिखा था- कलाम आपका बलिदान मांगता है। कलाम कोचिंग ने टीचर का बलिदान मांग लिया और कार्यमुक्त कर घर बैठा दिया। 4. चलते-चलते… मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने 1976 में सबसे बड़ा रुपैया फिल्म में एक गीत लिखा था। गीत के बोल थे- न बीवी न बच्चा, न बाप बड़ा न मैया, द होल थिंग इज दैट कि भैया सबसे बड़ा रुपैया। रहीमदास जी अगर आज के युग के रचनाकार होते तो लिखते- रहिमन पैसा राखिए, बिना पैसे सब सून.. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की तारीखें तय कर दी। यहां तक धनतेरस और छोटी दिपावली के दिन भी चुनाव रख दिए। अब इन तारीखों पर विरोध की बातें सामने आ रही हैं। त्योहार को देखते हुए तारीख बदलने की मांग की जा रही है। जोधपुर के केरू क्षेत्र में घंटियाला नाम का गांव है। गांव का एक व्यापारी पानी की टंकी पर जाकर बैठ गया। प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। व्यापारी ने टंकी के ऊपर से ही अपनी मांग बताई कि पंचायत चुनाव में त्योहार के आसपास वाली तारीख बदली जाएं। पुलिस की मशक्कत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी पानी की टंकी पर वहीं पहुंच गए जहां व्यापारी बैठा था। व्यापारी ने लिखकर सारे दस्तावेज तैयार कर रखे थे। उसने पुलिस अधिकारी को बताया- हमारे समाज के लोग राजस्थान से बाहर जाकर व्यवसाय करते हैं। अधिकतर लोग मिठाई के कारोबार से जुड़े हैं। त्योहार के सीजन में काम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में पीक सीजन में काम छोड़कर चुनाव में लगना ठीक नहीं। चुनाव को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। इसलिए चुनाव की तारीखें बदलनी चाहिए ताकि व्यापारी इत्मीनान से व्यापार कर सके। पुलिस अधिकारी भी व्यापारी का मर्म समझ गए। उन्होंने कहा- बात तो आपकी सही है, मैं आपकी मांग ऊपर तक पहुंचा दूंगा, बस आप नीचे उतर आइये। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।