राजस्थान यूथ कांग्रेस के चुनाव के रिजल्ट (4 अक्टूबर) में एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष रहे अभिषेक चौधरी को सबसे ज्यादा 6.15 लाख वोट मिले। हालांकि, दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों की भी अध्यक्ष बनने की उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। क्योंकि अंतिम निर्णय दिल्ली में होगा। लाखों वोटों की जीत के बाद भी आखिर अभिषेक के अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ क्यों नहीं है? आखिर कैसे चुने जाते हैं यूथ कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी? चुनाव से पार्टी के पास कैसे आया 24 करोड़ से ज्यादा फंड? अभिषेक की जीत से कांग्रेस का कौनसा गुट होगा मजबूत? भाजपा में क्या होगा असर… यही जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में। सवाल-1 : यूथ कांग्रेस का चुनाव होता कैसे है और पूरी प्रक्रिया क्या है? जवाब: भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) में संगठन के चुनाव की शुरुआत राजस्थान में साल 2010 में हुई थी। शुरुआती दो दौर में बैलेट पेपर के बाद अब चुनाव डिजिटल प्रोसेस से होते हैं। पूरा प्रोसेस 2-3 महीने लंबा होता है। स्टेप-1- मेंबरशिप: 18 से 35 साल का कोई भी युवा IYC एप पर 75 रुपए फीस देकर मेंबर बन सकता है। इस बार रिकॉर्ड 34 लाख 33 हजार 12 सदस्यों ने रजिस्ट्रेशन कराया। करीब 32 लाख से ज्यादा मेंबर से 24 करोड़ 48 लाख रुपए फीस जमा हुई। । जिन्होंने फीस जमा नहीं कराई, वो वोटिंग नहीं कर सके। स्टेप-2- वोटिंग: IYC एप पर तय तारीख पर वोटिंग। एक मेंबर एक साथ 6 पदों के लिए वोट करता है। इसमें ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, जिला महासचिव, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष शामिल हैं। राजस्थान में अब तक 5 बार साल 2010, 2013, 2020, 2023 और साल 2026 में चुनाव हुए। 2013 के कार्यकाल को एक्सटेंशन देते हुए 7 साल तक रखा गया था। सवाल-2 : चुनाव लड़ने की पात्रता क्या है? जवाब: उम्मीदवार को भी नॉमिनेशन शुल्क देना होता है और उसकी भी उम्र 35 साल तक होनी चाहिए। कुछ मामलों में 36 साल से 1 दिन कम तक के युवा को भी इसमें शामिल कर लिया जाता है। इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 19 उम्मीदवार मैदान में थे। बाद में मुकाबला 2-3 बड़े चेहरों पर ही सिमट गया। सवाल-3 : करोड़ों खर्च के बाद कुर्सी अभी भी पक्की क्यों नहीं? जवाब: वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा का कहना है कि धारणा ये है कि जिसको भी चुनाव लड़ना होता है, उसे बड़ी संख्या में वोटर्स की फीस राशि जेब से खर्च भी करनी पड़ जाती है। इसके अलावा चुनाव प्रचार और अन्य खर्च भी करने होते हैं। ऐसे में ये हिसाब करोड़ों का बैठता है। अभिषेक ने इस बार काफी आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ा और सर्वाधिक 6.15 लाख वोट हासिल किए। अब दिल्ली में होगा वन-टू-वन इंटरव्यू: वोटों के गणित के अनुसार अभिषेक का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है, लेकिन ये फाइनल नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है दिल्ली में आलाकमान के सामने इंटरव्यू। टॉप 3 वोट पाने वाले अभिषेक, अनिल और राजकुमार को आगामी 3-4 दिन में ही दिल्ली बुला लिया जाएगा। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब और प्रभारी मनीष शर्मा वन-टू-वन इंटरव्यू लेंगे। इसके बाद ही अध्यक्ष के नाम का ऐलान होगा। नई कार्यकारिणी का कार्यकाल 3 साल रहेगा। सवाल- 4: वोटिंग के बाद किसे कौन-सा पद मिलता है? जवाब: अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़े सभी प्रत्याशियों को प्रदेश कार्यकारिणी में पद दिए जाते हैं। जो जितने वोट लाया, उसे उसी हिसाब से उपाध्यक्ष, महामंत्री और सचिव बनाया जाता है। जैसे- चौथे नंबर पर निशा खीचड़ को 3338 वोट मिले तो उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला) बनाया गया। पांचवें नंबर पर रही अलफिजा को 2144 वोट मिले, उन्हें अल्पसंख्यक कोटे में उपाध्यक्ष बनाया गया। इसी तरह छगनलाल कुलदीप, प्रकाश चंद मीणा, भगवती मीणा को एससी-एसटी कोटे में उपाध्यक्ष बनाया गया। दिव्यांग कोटे में तेजकरण चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष, निर्मला मेघवाल को एससी-एसटी महिला, यास्मीन को अल्पसंख्यक महिला और शीतल परिहार और राहुल खान लक्ष्मणगढ़ सीकर को ओबीसी कोटे में उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। डिंपल सिंधल, सुमन बानो, दिव्यानी कटारा, पूजा भार्गव आशीष सचिव पद पर निर्वाचित हुए। सवाल-5 : रिजल्ट के बाद डोटासरा से मिलने अभिषेक, इसके क्या मायने हैं? जवाब: रिजल्ट के बाद अभिषेक PCC अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मिलने पहुंचे। उन्होंने डोटासरा से मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया और कई विषयों पर चर्चा की। अभिषेक को गोविंद डोटासरा-अशोक गहलोत गुट का माना जाता है। जबकि दूसरे नंबर पर रहे अनिल चोपड़ा पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के करीबी रहे हैं। डोटासरा से मिलना एक तरह से संगठन में अपनी लॉबिंग मजबूत करना है। क्योंकि फाइनल फैसला दिल्ली में इंटरव्यू से होगा और वहां तक जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग होगी। सवाल- 6: अगर अभिषेक यूथ अध्यक्ष बने तो बीजेपी के लिए क्या दिक्कतें हो सकती हैं? जाट + यूथ फेस: अभिषेक जाट समुदाय से आते हैं और NSUI के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। झोटवाड़ा जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा कैंडिडेट राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने 97,746 वोट हासिल कर चुके हैं। बीजेपी के सामने एक ऐसा यूथ चेहरा होगा जो राजस्थान के युवाओं में अच्छी-खासी पकड़ रखता है। पंचायत चुनाव से पहले संगठन चार्ज: अभी राजस्थान में पंचायत राज चुनाव होने वाले हैं। यूथ कांग्रेस के 400 ब्लॉक अध्यक्ष और 200 विधानसभा अध्यक्ष ग्राउंड पर कांग्रेस के लिए बूथ मैनेजमेंट करेंगे। अनिल चोपड़ा वाला नैरेटिव: अनिल चोपड़ा 2024 लोकसभा में जयपुर ग्रामीण से सिर्फ 1615 वोट से हारे थे। अगर अभिषेक और अनिल दोनों साथ आ गए तो 2028 विधानसभा के लिए कांग्रेस के पास दो यूथ फाइटर होंगे। NSUI से यूथ इकाई तक मुखर चेहरा: अशोक गहलोत सरकार में जब गोविंद डोटासरा PCC चीफ बने थे, तब अभिषेक को NSUI की कमान मिली थी। अब यूथ कांग्रेस में भी वही चेहरा रिपीट होने से कांग्रेस में यूथ की एक ही लाइन बनेगी, जो बीजेपी के लिए कैंपस और बेरोजगारी के मुद्दों पर परेशानी खड़ी कर सकती है।
