नमस्कार, राखी बांधकर पूर्व सीएम ने पूर्व मंत्री से एक ‘आदत’ छोड़ने की मांग कर दी। केकड़ी में विधायकजी ने पूर्व चेयरमैन को बाहों में खूब भींचा, लेकिन साहब हाथ से निकल गए। नागरजी बिना बुलाए वॉररूम में घुसना चाहते थे, लेकिन उनके लिए गेट नहीं खुले। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. राखी बांधकर पूर्व CM बोलीं- नो मोर.. उनका नाम राजपाल सिंह शेखावत है। वे अपने समय के कद्दावर नेता रहे हैं। झोटवाड़ा में उसका डंका बजता था। वसुंधरा राजे जब सत्ता में रही तब उनके करीबी नेता राजपाल सिंह कैबिनेट मंत्री बने। यूडीएच, उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम जैसे विभाग के मालिक रहे। 2023 में पार्टी ने झोटवाड़ा से उनका टिकट काट दिया। उनके समर्थक वसुंधरा राजे के अवास पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। वह चुनाव तो पार्टी ने जीता, लेकिन समीकरण बदल गए। केंद्रीय आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व बदल दिया। वक्त के साथ काफी कुछ बदल गया था। लेकिन जो एक चीज नहीं बदली थी, वह थी शेखावत साहब की पान मसाला खाने की आदत। इस बार राखी पर राजपाल सिंह पूर्व सीएम के आवास पर पहुंचे और राखी बंधवाई। राजे उनकी आदत से अवगत थीं। राखी बांधकर वसुंधरा राजे ने बड़ी बहन की तरह उलाहना दिया। कहा- मिठाई या नेग नहीं चाहिए। कुछ देना ही है तो यह दे दो। इशारा पान मसाले की लत की तरफ। राजे ने आदेश जैसा दिया- नो मोर। यानी अब और ज्यादा नहीं। राजपाल ने भी वचन दिया कि अब पान मसाला नो मोर। देखने वाली बात अब ये है कि राखी पर बहन को दिया वचन भाई निभाता है या फिर आदत भारी पड़ेगी। 2. विधायक जी ने बाहों में भींचा, लेकिन पूर्व चेयरमैन निकल गए.. चुनावी सीजन में रस्साकशी का खेल तेज हो जाता है। मोहरों को अपने पाले में लाने के लिए हर तरह की कवायद की जाती है। केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने कांग्रेस नेता और नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन कमलेश साहू को अपने पाले में कर लिया। आनन-फानन में दफ्तर में प्रोग्राम कर लिया गया। नई पगड़ी लागकर साहू जी का सम्मान कर दिया गया। पार्टी का पटका गले में डाल दिया गया। विधायक जी ने साहू को कस के अपनी बांहों में भर लिया। ऐसा लग रहा था कि साहू जी अब कहीं नहीं जाएंगे। भाजपा का परचम लहराएंगे। साहू जी ने माइक थामकर कहा भाजपा के कुशल नेतृत्व, विधायक जी के बड़े दिल, तरक्की की रफ्तार समेत वे सभी बातें कहीं जो दलबदल के भाषण में जरूरी होती हैं। इस घटना के दो दिन बाद रस्सी का दूसरा छोर कांग्रेस वालों ने खींचना शुरू किया। अपना मोहरा वे वापस अपने पाले में लाने में कामयाब रहे। दो नेताओं के बीच में बैठाकर साहू जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस करा दी। साहू जी ने बुझी-बुझी आवाज में कहा- मुझे डरा-धमका कर बीजेपी जॉइन करा दी। मैं तो घर भी नहीं जा पाया। दो ही घंटे में सब कुछ करा दिया। मैंने तो कांग्रेस से इस्तीफा भी नहीं दिया है। मैं कांग्रेस में था, हूं और कांग्रेस में ही रहूंगा। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि विधायक जी ने ऐसी कौन सी कमी रख छोड़ी जिससे साहू जी दो दिन भी नहीं टिक पाए और रेत की तरह फिसल गए। 3. चलते-चलते.. बाबूलाल नागर की तूती बोलती थी। दूदू में उनका काफी नाम था। फिर एक घटना के कारण नाम खराब हो गया। इनका मैटर भी कुछ-कुछ बाड़मेर वाले जैन-जी जैसा था। एक नेता के सौ गुनाह माफ हो सकते हैं, लेकिन चरित्र पर लगा दाग धुलना मुश्किल। नागर साहब ने खूब पूजा पाठ किए। शनि शिंगणापुर जाकर शनिदेव को तेल चढ़ाया। लेकिन अलाएं-बलाएं पीछा नहीं छोड़तीं। जयपुर में कांग्रेस मुख्यालय में वॉर रूम में चुनाव को लेकर फाइनल मुहरें लग रहीं थीं। नागर साहब वॉर रूम में जाने के इच्छुक थे। वे मुख्यालय पहुंच गए। दरवाजे पर से सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें लौटा दिया। नागर जी ने भी हार नहीं मानी। कभी इसे फोन लगाया तो कभी उसे फोन लगाया। फोन घुमाने का भी कोई असर नहीं। दरवाजा नहीं खुला। थक हार कर नागर साहब ने ड्राइवर को इशारा किया। ड्राइवर गाड़ी लेकर उनके पास पहुंचा। नागरजी ने कुर्ते की पिछली लटकन को उलथा और कार में बैठ गए। जाते-जाते उन्होंने सोचा तो बहुत होगा कि कृपा आखिर अटक कहां गई? वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
