राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में पॉल्यूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नदियों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी है। इसके अलावा जहां हाई फ्लड लाइन निर्धारित है, वहां उसके दोनों ओर प्रदूषण या नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी औद्योगिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम आदेश देते हुए कहा- जब तक वैज्ञानिक तरीके से हाई फ्लड लाइन और आवश्यक इकोलॉजिकल बफर जोन का निर्धारण और सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक नदी को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। हाई फ्लड लाइन के वैज्ञानिक निर्धारण तक अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर आदेश वहीं हाई फ्लड लाइन के वैज्ञानिक निर्धारण तक कोर्ट ने अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर आदेश दिया कि जहां मौजूदा फ्लड लाइन चिह्नित है या नदी का वर्तमान प्रवाह मार्ग मौजूद है, उसके दोनों ओर 500 मीटर के भीतर प्रदूषण, संदूषण या नदी पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले खतरनाक उद्योग अथवा गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। हाई लेवल कमेटी की शक्तियां बरकरार सुनवाई के दौरान हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी और राज्य सरकार द्वारा गठित इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप के सदस्यों में समानता को लेकर भी मुद्दा उठा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप सरकार के विभागों के बीच समन्वय के लिए एक आंतरिक व्यवस्था है और यह हाई-लेवल कमेटी के अधिकार क्षेत्र में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर कमेटी के चेयरपर्सन अपने स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रभावी और त्वरित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश और आदेश जारी कर सकेंगे। कमेटी को पहले दिए गए कार्रवाई करने के अधिकार भी पूरी तरह लागू रहेंगे। SIT ने 16 आपराधिक मामलों की समीक्षा की राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने अपनी अनुपालन रिपोर्ट और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट भी पेश की। एसआईटी ने जोधपुर, पाली और बालोतरा में नदी प्रदूषण से जुड़े 16 आपराधिक मामलों का रिव्यू किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर जहां भी इस तरह का मामला आया है, वहां गंभीर धाराओं को जोड़कर कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। जांच एजेंसी की ओर से डॉक्यूमेंट, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, फोटो और वीडियो की भी जांच की जा रही है। राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे सुधारात्मक कार्यों और लूणी, जोजरी तथा बांडी नदियों के पुनर्जीवन की प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट को दी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राजस्थान सरकार को इन नदियों के प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 20 सूत्रीय समाधान योजना तैयार करने का सुझाव दे चुका है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप बनाने और नदी इकोसिस्टम के पुनर्जीवन के लिए स्वतंत्र व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए थे। यह है पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 16 सितंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। इसमें स्टील और टैक्सटाइल सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की बड़ी भूमिका सामने आई थी। कोर्ट ने पाया कि पिछले दो दशकों से प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता के कारण करीब 20 लाख लोगों का जीवन, पशुधन और पर्यावरण गंभीर खतरे में है। राजस्थान की मौसमी नदियों में से एक जोजरी जोजरी प्रदेश की एक प्रमुख मौसमी नदी है। यह नागौर जिले के पाण्डलू गांव की पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर जिले में खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। पिछले कई सालों से जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली जिलों की फैक्ट्रियों, खासकर टैक्सटाइल और स्टील री-रोलिंग यूनिट्स से निकलने वाला प्रदूषित पानी जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी के किनारे बसे 50 से ज्यादा गांव और बस्तियां इससे सीधे तौर पर प्रभावित हैं। ——————– मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… जोजरी-नदी-मामला: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य-सचिव को ठहराया जिम्मेदार:अगली सुनवाई में होंगे पेश, हाई लेवल कमेटी बोली- प्रदूषित पानी से कम हुए वन्यजीव जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन (औद्योगिक प्रदूषण) और वॉटर सोर्सेज (जल स्रोतों) की बिगड़ती स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पर्यावरणीय चिंताओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। (पूरी खबर पढ़ें…) जोजरी नदी मामला,सुप्रीम कोर्ट बोला-20 लाख लोगों की रक्षा करेंगे:चाहे कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं; SIT की जांच केवल दिखावा जोजरी-बांडी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगा रिवर कमीशन; नदी कॉरिडोर में नए निर्माणों पर रोक