झालावाड़ में मंगलवार को जिले के स्कूलों में बच्चों को शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ का फर्क समझाया गया और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश दिया गया। निर्मल मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में जिला एवं सेशन जज आलोक सुरोलिया ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाला दुर्व्यवहार उनके भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ की पहचान, पॉक्सो एक्ट तथा अपने अधिकारों की जानकारी दी। जज सुरोलिया ने बच्चों से किसी भी गलत स्पर्श, हिंसा या अभद्र व्यवहार की तुरंत शिकायत करने का आह्वान किया। उन्होंने यह जानकारी अपने छोटे भाई-बहनों और अन्य बच्चों तक भी पहुंचाने का आग्रह किया। बच्चों को किया जागरूक
अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज नरेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत नियत से स्पर्श करे या अश्लील हरकत करने का प्रयास करे तो बिना डरे इसकी जानकारी माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कानून बच्चों को सुरक्षित शरीर, सुरक्षित मन और सुरक्षित वातावरण का अधिकार देता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहित सक्सेना ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मंगलपुरा में छात्राओं को पॉक्सो एक्ट और ‘गुड टच-बैड टच’ के बारे में जागरूक किया।
इसके अलावा जिले के सभी न्यायिक अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को शोषण के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
