जयपुर,जोधपुर और कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। मेयर चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन शनिवार को भाजपा-कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए। इससे पहले दोनों ही पार्टियों में नामों की चर्चा चलती रही, लेकिन ऐलान नहीं किया गया। जयपुर में बीजेपी ने पार्षदों से 3-3 नाम लेकर बाड़ेबंदी में भेज दिया था। सीएमआर में लंबे मंथन के बाद सुनील कोठारी के नाम पर सहमति बनी। फिर उन्हें कॉल किया गया और पुष्कर बाड़ेबंदी से जयपुर बुलाया गया। एक बारगी उनका नाम अटकता दिखाई दे रहा था। सवाल उठा था कि उदयपुर और जोधपुर के बाद क्या पार्टी को जयपुर में भी जैन समाज से ही प्रत्याशी बनाना चाहिए। सुनील कोठारी को किस्मत का साथ मिला और नाम का ऐलान हो गया। जोधपुर में बीजेपी ने मेयर पद पर प्रसन्नचंद मेहता को उतारा। वहीं कांग्रेस ने (हाइब्रिड) गैर पार्षद राजेंद्र सोलंकी को मेयर पद पर उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी और यूआईटी व जेडीए चेयरमैन रहे हैं। उन्होंने निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। कोटा में बीजेपी ने अनुसुईया गोस्वामी को अपना मेयर उम्मीदवार बनाया है। कोटा में समीकरण बदलने के साथ ही अनुसुईया का नाम पीछे हो गया था। नामांकन खत्म होने में चालीस मिनट का समय बचा था, तब जाकर उनके नाम के दो सेट प्रस्तावकों के जरिए जमा करवाए गए। पढ़िए- तीनों नगर निगम में मेयर दावेदार के लिए कैसे चली गहमागहमी जयपुर भाजपा: जयपुर में भाजपा 150 में से 78 सीटों पर चुनाव जीती। ऐसे में बहुमत के हिसाब से सुनील कोठारी का मेयर बनना तय है। एकबारगी सुनील कोठारी का नाम अटकता दिख रहा था। पार्टी उदयपुर में जैन समाज से पारस सिंघवी को मेयर प्रत्याशी बना चुकी थी। वहीं जयपुर में नाम तय होने से पहले पार्टी ने जोधपुर में प्रसन्न मेहता को अपना प्रत्याशी बना दिया था। उदयपुर और जोधपुर के बाद भी क्या पार्टी को जयपुर में भी जैन समाज से ही प्रत्याशी बनाना चाहिए। ऐसे में सुनील कोठारी की किस्मत को इतिहास का भी साथ मिला। ठीक इस तरह की स्थिति बीजेपी में पहले भी हो चुकी है। 2014 में भाजपा में निर्मल नाहटा जयपुर और चंद्रसिंह कोठारी उदयपुर के मेयर थे। दोनों जैन समुदाय से आते थे। उसके बाद यह तय किया गया कि मेयर का पद जयपुर के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जैन समाज को साधना यहां ज्यादा जरूरी है। ऐसे में फाइनली सुनील कोठारी के नाम को आगे बढ़ा दिया गया। पूर्व बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने लिखी पूरी पटकथा दरअसल, सुनील कोठारी के मेयर बनने की पूरी पटकथा करीब 6 महीने पहले ही लिखी जा चुकी थी। बीजेपी के एक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, जो संघ के बेहद करीब माने जाते हैं। उन्होने सुनील कोठारी को टिकट दिलाने से लेकर मेयर बनाने में अहम भूमिका निभाई। बताते हैं कि उन्हीं के कारण संघ ने सुनील कोठारी को सीएमआर में कॉर्डिनेटर के तौर पर लगाया था। कोठारी पिछले कुछ महीने से संघ और सरकार के बीच समन्वय का काम देख रहे थे। ऐसे में सीएम और संघ उनकी कार्यशैली से प्रभावित थे। निकाय चुनाव की घोषणा के बाद जब कोठारी को चुनाव लड़ाना तय हुआ तो उनके मेयर बनने तक के सफर की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं नेता ने संभाली। उन्होंने सत्ता, संगठन और संघ को सुनील कोठारी के नाम पर एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई। पूरी खबर पढ़ें… कांग्रेस: ने 3 नॉमिनेशन फॉर्म भरवाए हैं। कांग्रेस से सुनीता मावर, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को हराने वाली सुनीता मेठी और दशरथ अटल ने फॉर्म भरा है। हालांकि अधिकृत प्रत्याशी सुनीता मावर होने से बाकी दोनों का फॉर्म स्क्रूटनी में खारिज हो जाएगा।
जोधपुर कांग्रेस ने बागियों और निर्दलीयों को मनाने के लिए खेला कार्ड जोधपुर में भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता और कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी पर दांव खेला है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत किसी भी कीमत पर जोधपुर सीट अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। ऐसे में जिन 7 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया है, उन्हें किसी भी तरह अपने पक्ष में करने के लिए जोड़-तोड़ किया जा रहा है। इन 7 में से 3 पार्षद कांग्रेस विचारधारा के है। कांग्रेस ने नामांकन से ढाई घंटे पहले राजेंद्र सोलंकी के नाम का फैसला लिया। कांग्रेस के बागियों का मूड बदलने के लिए मेयर के चुनावी मैदान में राजेंद्र सोलंकी की एंट्री करवाई गई है। इससे पहले शुक्रवार को गणपत सिंह चौहान, नरेश जोशी और प्रदीप गांग का नाम चल रहा था। चौथा नाम राजेंद्र सोलंकी था। वहीं आज करण सिंह उचियारड़ा, राजेंद्र सोलंकी और पूर्व विधायक मनीषा पंवार से भी नॉमिनेशन भरवाने की चर्चा थी। लेकिन बीजेपी के सिंगल नेम प्रसन्नचंद मेहता के ऐलान के बाद कांग्रेस ने भी अपना दावा बदल दिया और राजेंद्र सोलंकी से नॉमिनेशन भरवा दिया। गहलोत के करीब हैं राजेंद्र सोलंकी: राजेंद्र सोलंकी पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबियों में से एक माने जाते हैं। सोलंकी पूर्व जेडीए और यूआईटी चेयरमैन भी रह चुके हैं। इसके अलावा गहलोत सरकार में राज्यमंत्री का भी दर्जा मिला था। पार्षद भी इनके नाम पर राजी थे। बीजेपी ने जयपुर से बुलाकर प्रसन्नचंद मेहता को लड़वाया था चुनाव भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को मेयर का प्रत्याशी बनाया है। निकाय चुनावों में प्रसन्नचंद मेहता समेत भाजपा के सीनियर नेताओं को अलग-अलग शहरों के निकाय चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रसन्नचंद मेहता को जयपुर निकाय चुनाव का प्रभारी बनाया गया था, लेकिन पार्षद का टिकट देने के लिए मेहता को दोबारा जयपुर से जोधपुर बुलाया और चुनावी मैदान में उतारा। मेयर पद के दावेदारों में प्रसन्नचंद मेहता के अलावा मेघराज लोहिया और कमलेश पुरोहित का भी था। बाड़ेबंदी में दो घंटे तक पार्षदों के साथ बैठक के बाद प्रसन्नचंद मेहता के नाम पर सहमति बनी। (पढ़ें पूरी खबर)
कोटा बीजेपी में अंतिम समय में अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर मुहर कोटा मेयर चुनाव के लिए भाजपा से अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस ने सुनीता कुमारी को प्रत्याशी बनाया। बीजेपी में एक नाम पर सहमति के लिए काफी जद्दोजहद चली। नॉमिनेशन के आखिरी वक्त में अनुसुईया के नाम की घोषणा हुई। इससे पहले तक एक घमासान मचा रहा।
सूत्रों ने बताया कि सहमति बनाने के लिए ही अलग-अलग खेमे के पार्षदों को एक साथ चित्तौड़गढ़ ले जाया गया था। बाड़ेबंदी के दौरान भाजपा के पार्षदों से गणेश जी महाराज के जयकारे लगवाए गए थे। बाड़ेबंदी में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, शहर जिला अध्यक्ष राकेश जैन मौजूद रहे थे। भाजपा में मेयर पद प्रत्याशी को लेकर सीमा चौधरी, प्रतिभा सुमन के नाम को लेकर चर्चा थी। आखिरी वक्त पर अनुसुईया गोस्वामी का नाम चर्चा में आया और आखिरी वक्त पर नॉमिनेशन किया गया। (पढ़ें पूरी खबर) …… ये खबर भी पढ़ें…. जयपुर में भाजपा से सुनील कोठारी मेयर उम्मीदवार:कांग्रेस ने 3 प्रत्याशी उतारे, कोटा में आखिरी समय में नाम तय; जोधपुर में गैर पार्षद कांग्रेस उम्मीदवार
