राजस्थान के टोंक जिले में दुर्लभ अल्बिनो (सफेद/सूरजमुखी) गिलहरी दिखाई दी है। देवली स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के आरटीसी परिसर के वन क्षेत्र में नीम के पेड़ों के बीच नजर आई इस गिलहरी को वहां जवानों ने अपने मोबाइल में कैद किया। विभागीय अफसरों का कहना है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है और वन्य जीवों का लगातार संरक्षण भी किया जा रहा है, इसी का प्रयास है कि दुर्लभ गिलहरी यहां दिखाई दी है। हालांकि जिले में पिछले साल जून में भी सफेद गिलहरी दिखाई दी थी। एक लाख में एक होती है अल्बिनो गिलहरी
वन विभाग के सहायक वन संरक्षक(ACF) अनुराग महर्षि ने बताया कि करीब एक लाख गिलहरी के बच्चों में से केवल एक अल्बिनो हो सकती है। अल्बिनो कोई अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि यह आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic Mutation) के कारण शरीर में मेलेनिन (रंगद्रव्य) की कमी से उत्पन्न होने वाली स्थिति है। इसी वजह से गिलहरी का फर सफेद और आंखें लाल या गुलाबी दिखाई देती हैं। टोंक में दूसरी बार दिखाई दी
वन विभाग के सहायक वन संरक्षक(ACF) अनुराग महर्षि ने बताया- राजस्थान में अल्बिनो गिलहरी का यह संभवतः दूसरा प्रमुख रिकॉर्ड है। इससे पहले भी लगभग एक साल पहले इसी CISF परिसर में ऐसी गिलहरी देखी गई थी। उनका कहना है कि देवली का हराभरा परिसर इस दुर्लभ जीव के लिए सुरक्षित आवास साबित हो रहा है, जो वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अच्छे संकेत है। उन्होंने बताया कि अल्बिनो गिलहरी किसी अलग प्रजाति की नहीं होती। यह सामान्य गिलहरी ही होती है, लेकिन आनुवंशिक कारणों से उसका रंग सफेद हो जाता है। यह जरूरी नहीं कि अल्बिनो गिलहरी की संतान भी सफेद ही हो।
