राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में जोधपुर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था बदहाल पाई गई है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले को पहले से लंबित एक जनहित याचिका के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ में अधिवक्ता नमन भंसाली की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में शहर में फैली गंदगी, कचरा संग्रहण व्यवस्था की कमी और स्वच्छता के नाम पर शुल्क वसूले जाने के बावजूद सुधार न होने का मुद्दा उठाया गया था। शहर में सफाई व्यवस्था मानकों में नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट प्रशांत टाटिया ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने जोधपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 110 किलोमीटर का निरीक्षण किया। इस दौरान 27 प्रमुख स्थानों, जिनमें पार्क, बाजार, अस्पताल, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक इमारतें और शिक्षण संस्थान शामिल हैं, की स्थिति का जायजा लिया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्थानों पर सफाई के निर्धारित मानक पूरे नहीं हो रहे थे। विशेष रूप से पुराने शहर के इलाकों में कचरा संग्रहण व्यवस्था कमजोर पाई गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को नगर निगम की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि इसी विषय पर एक डीबी सिविल रिट याचिका पहले से लंबित है। अलग-अलग मामलों में विरोधाभासी आदेशों से बचने के लिए, वर्तमान याचिका को उसी मामले के साथ जोड़ने के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया गया है।
