उदयपुर के 80 वार्डों के चुनाव नतीजों में जीत-हार के साथ कई ऐसे समीकरण सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक दलों को भी चौंका दिया। भाजपा विधायक के ‘मिनी पाकिस्तान’ बयान के बीच कांग्रेस के पांचों मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा का एक भी मुस्लिम चेहरा चुनाव नहीं जीत सका। वहीं आपसी झगड़ों और खींचतान के बीच तीन वार्डों के नतीजे भी खास रहे। इन नतीजों ने स्थानीय राजनीति में वोटों के समीकरण और प्रत्याशियों के प्रभाव की नई तस्वीर सामने रखी है। दरअसल, उदयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा ने बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने की स्थिति जरूर बनाई, लेकिन 80 वार्डों के परिणामों में कई ऐसे नतीजे भी सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय पकड़ को लेकर तस्वीर बदल दी। कहीं कांग्रेस के पूरे जोर और मतदान के दिन हुए विवादों के बावजूद भाजपा प्रत्याशी जीत गए तो कहीं भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इलाकों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। सीपीआई-एम ने भी एक वार्ड में जीत दर्ज की जबकि बीएपी खाता खोलने में भी नाकाम रही। कुछ वार्डों में बेहद करीबी मुकाबले हुए तो कई पुराने और चर्चित चेहरों की वापसी हुई। मुस्लिम प्रतिनिधित्व में भी इस बार बड़ा अंतर सामने आया। विवाद के बीच भाजपा की दोनों सीटें निकलीं वार्ड 76 में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला मतदान के दिन तक काफी तनावपूर्ण रहा। कांग्रेस की ओर से ब्लॉक अध्यक्ष कमल डांगी ने अपनी बहू इन्द्रा डांगी को जिताने के लिए रात-दिन जोर लगाया। मतदान के दिन दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच कई बार फर्जी वोटिंग के आरोपों को लेकर बहस और विवाद की स्थिति बनी। इसके बावजूद भाजपा की कविता जोशी ने जीत दर्ज की। कविता जोशी पहले सरपंच रह चुकी हैं। वे भाजपा मंडल अध्यक्ष मुकेश जोशी की पत्नी हैं और खुद भी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। वार्ड 80 में भी दिनभर के हंगामे के बीच प्रताप राठौड़ जीते वार्ड 80 में भाजपा के प्रताप सिंह राठौड़ को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के हंगामे के बीच जीत मिली। कांग्रेस की ओर से पूर्व सरपंच के बेटे योगेश पुष्करण ने पूरी ताकत लगा रखी थी। मतदान के दौरान यहां भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और हंगामे की स्थिति बनी रही, लेकिन अंतिम परिणाम भाजपा के प्रताप राठौड़ के पक्ष में रहा। वार्ड 1 में भी भाजपा का जोर काम नहीं आया वार्ड 1 में कांग्रेस प्रत्याशी संजय शर्मा के लिए भी मुकाबला काफी जोरदार रहा। तमाम जोर लगाने के बावजूद भाजपा के दीपक शर्मा को हार का सामना करना पड़ा। दीपक शर्मा के प्रचार के लिए पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ तक ने प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी सरपंच रहे संजय शर्मा जीत दर्ज करने में सफल रहे। मिनी पाकिस्तान बयान वाले इलाकों में भाजपा को झटका भाजपा के उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन का आयड़ और खांजीपीर इलाके को लेकर दिया गया मिनी पाकिस्तान का भारी बयान इन इलाकों में भाजपा पर भारी पड़ा। आयड़ और खांजीपीर दोनों इलाकों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। मतदान के दिन शहर विधायक ताराचंद जैन का कांग्रेस प्रत्याशी हितांशी शर्मा और उनके पिता के.के. शर्मा ने विरोध भी किया। विरोध के बाद विधायक बूथ तक नहीं जा पाए। सीपीआई के वसीटा जीते भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इलाकों के बीच सीपीआई-एम ने जीत दर्ज की। वार्ड 32 से राजेन्द्र वसीटा ने जीत दर्ज की। पार्टी ने अपने परंपरागत वोट के भरोसे शहर में अपनी मौजूदगी कायम रखी है। राजेन्द्र वसीटा खुद पहले पार्षद रह चुके हैं। रोत के प्रचार के बावजूद बीएपी का खाता नहीं खुला, नोटा से भी कम वोट राजकुमार रोत के प्रचार के बावजूद बीएपी शहर में अपना खाता नहीं खोल पाई। वार्ड नंबर 13 में 77 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। वहीं बीएपी प्रत्याशी संतोष कटारा को नोटा से भी कम 61 वोट मिले। इस वार्ड में भाजपा की रतन बाई ने जीत दर्ज की। 100 से कम वोटों से जीते 7 प्रत्याशी 80 वार्डों के परिणामों में 7 ऐसे प्रत्याशी रहे, जिन्होंने 100 से भी कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इनमें स्नेहलता टांक, आकाश वागरेचा, कुलदीप मेहता, राहुल माली, मनोज साहू, लोकेश साहू और महेन्द्र सिंह के नाम शामिल हैं। इन वार्डों में जीत का अंतर बेहद कम रहा और अंतिम परिणाम तक मुकाबला कड़ा बना रहा। विधायक के गृह इलाके में भी भाजपा प्रत्याशी नहीं जीती, बागी मेहता भारी! ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के खुद के गृह इलाके के वार्ड में भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। पुरोहितों की मादड़ी के वार्ड 61 से भाजपा से बागी होकर मैदान में उतरे कमलेश मेहता की पत्नी खुशबु ने सीट पर अपना कब्जा कायम रखा। कमलेश मेहता पहले इस वार्ड से पार्षद रह चुके हैं। इस चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही। विधायक के खुद के वार्ड में भी कमलेश मेहता की वर्किंग काम आई और विधायक अपने प्रत्याशी सुषमा चौहान को जीत नहीं दिला पाए। ओल्ड सिटी में भाजपा की पकड़ कमजोर दिखी ओल्ड सिटी के परंपरागत वार्डों में इस बार भाजपा को अपेक्षाकृत कम वार्ड मिले। वार्ड 17 से पूनम राठौड़ और वार्ड 15 से प्रतीक नागर की जीत ने इन इलाकों में भाजपा की कमजोर पकड़ को सामने ला दिया। ये वार्ड भाजपा के मजबूत और परंपरागत वोटर्स वाले माने जाते हैं, ऐसे में यहां पार्टी के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन को अहम माना गया। साजिद खान की सबसे बड़ी जीत, आकाश वागरेचा की सबसे छोटी इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत साजिद खान के नाम रही। उन्होंने 2790 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं सबसे कम अंतर से जीतने वाले प्रत्याशी आकाश वागरेचा रहे, जिन्होंने महज 50 वोटों के अंतर से चुनाव जीता। वागरेचा की जीत शहरभर में चर्चा में रही। कांग्रेस के रवि सुखवाल ने उन्हें कड़ी टक्कर दी और मुकाबले ने पार्टी की चिंता बढ़ा रखी थी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पत्नी को जिताने में रहे सफल कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ अपनी पत्नी पूनम कुंवर को चुनाव जिताने में सफल रहे। फतेह सिंह राठौड़ इससे पहले खुद पार्षद का चुनाव हार चुके हैं, लेकिन इस बार भाजपा के वार्ड में पत्नी पूनम कुंवर को जीत दिलाने में सफल रहे। बड़े और चर्चित चेहरों पर दांव काम आया इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने जिन चर्चित या बड़े चेहरों पर दांव लगाया, उनमें से कोई भी चुनाव नहीं हारा। भाजपा में महेन्द्र सिंह और आकाश वागरेचा की जीत से पार्टी की लाज बची। वहीं कांग्रेस में भी शंकर चंदेल, अरुण टांक और पूनम की जीत से पार्टी की साख बची। पुराने पार्षदों की वापसी भी हुई इस चुनाव में कुछ पुराने चेहरों की वापसी भी हुई। भाजपा के पुराने पार्षद आशीष कोठारी को इस बार वार्ड बदलकर मैदान में उतारा गया था। इसके बावजूद वे जीतने में सफल रहे। कांग्रेस के पहले पार्षद रह चुके लक्ष्मीनारायण मेघवाल की भी वापसी हुई। इसके अलावा कांग्रेस के अरूण टांक, हितांशी शर्मा और शंकर चंदेल पहले पार्षद रह चुके हैं। भाजपा के महेन्द्र सिंह शेखावत, अतुल चंड़ालिया, पारस सिंघवी, विजय आहूजा, प्रमोद सामर और अमिता गौड़ भी पहले पार्षद रह चुके हैं। माकपा के राजेन्द्र वसीटा खुद पहले पार्षद रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी खुशबु मेहता के पति कमलेश मेहता भी पहले पार्षद रह चुके हैं। इस तरह इस चुनाव में कई अनुभवी चेहरों ने दोबारा एंट्री की। ऐन मौके पर टिकट, युवा चेहरे ने जीता चुनाव कांग्रेस ने ऐन मौके पर वार्ड नंबर 30 से रोहित मेघवाल को टिकट दिया। रोहित मेघवाल युवा और फ्रेशर चेहरा हैं। उन्होंने चुनाव जीतकर निगम में अपनी जगह बनाई। कांग्रेस के पांच मुस्लिम चेहरे जीते, भाजपा का एक भी नहीं 80 वार्डों के इस चुनाव में कुल 5 मुस्लिम चेहरे पार्षद बने हैं और ये सभी कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी हैं। भाजपा का एक भी मुस्लिम प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर पाया। कांग्रेस के हिदायतुल्ला, मीना बानो, हीना कौसर बानो, साजिद खान और रूखसार खान चुनाव जीते हैं। इनमें हीना मुस्तफा शेख की पत्नी हैं, जबकि रूखसार पूर्व मोहसिनी की पत्नी हैं। भाजपा ने इस बार दो मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारा था।