जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन (औद्योगिक प्रदूषण) और वॉटर सोर्सेज (जल स्रोतों) की बिगड़ती स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पर्यावरणीय चिंताओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। इसके साथ ही राजस्थान के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। ऐसे में उन्हें अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। इधर, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई हाई लेवल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया- प्रदूषित पानी की वजह से यहां वन्यजीव कम हो गए हैं। कमेटी ने फॉरेस्ट एरिया भी डेवलप करने की सिफारिश की है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्य के विभिन्न हिस्सों में जल स्रोतों में औद्योगिक प्रदूषण की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं।
कमेटी ने बताया- प्रदूषित पानी का असर वन्यजीवों पर अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में जोजरी नदी के पास तनावड़ा स्थित एक तालाब का पानी गुलाबी होने और मानव व पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त होने का उल्लेख किया गया है। यदि ये तथ्य सही पाए जाते हैं, तो इसका गंभीर असर भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है। एक उच्च-स्तरीय इको-सिस्टम ओवरसाइट कमेटी ने जोधपुर की मेलबा, धवा, झंवर और लूणी तहसील के आसपास प्रदूषण से वन्यजीवों पर पड़ रहे असर को भी रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं, जिनकी संख्या प्रदूषित पानी के कारण कम हुई है। कमेटी ने मेलबा और मोडाथली की कुछ भूमि को वन विभाग को सौंपकर वन एवं घास भूमि (चारागाह) के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। इस संबंध में कोर्ट ने राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, सांगारिया सीईटीपी (CETP) में जमा औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी के सुरक्षित उपचार और निस्तारण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तकनीकी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया- इस प्रक्रिया की आड़ में इंडस्ट्री शुरू नहीं हो सकेगी यह प्रक्रिया कमेटी की निगरानी में होगी और वैज्ञानिक जांच के बाद ही पानी का निस्तारण किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया की आड़ में बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा। अदालत ने राज्य सरकार से प्रदूषण के मामलों पर विस्तृत हलफनामा भी मांगा है। साथ ही, अवैध रूप से बिना उपचारित (untreated) औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने के मामलों में गंभीर आपराधिक धाराएं नहीं लगाने पर जवाब तलब किया है। यह है पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 16 सितंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। इसमें स्टील और टेक्सटाइल सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की बड़ी भूमिका सामने आई थी। कोर्ट ने पाया कि पिछले दो दशकों से प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता के कारण करीब 20 लाख लोगों का जीवन, पशुधन और पर्यावरण गंभीर खतरे में है। — यह पढ़ें पूरी खबर… जोजरी नदी मामला,सुप्रीम कोर्ट बोला-20 लाख लोगों की रक्षा करेंगे:चाहे कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं; SIT की जांच केवल दिखावा जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- हमें जो बताया गया है, उसके अनुसार एसआईटी की जांच भी महज एक दिखावा है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)