राज्य सरकार की ओर से हाल ही में शुरू की गई नई इलेक्ट्रिक बसों में से एक बस आज सुबह जयपुर के टोंक रोड पर बीच रास्ते अचानक बंद हो गई। बस के सभी गेट ऑटो लॉक हो गए। वहीं बस में सवार करीब 25 से 30 यात्री अंदर फंस गए। बीच रास्ते अचानक बदं होने से बस में तेज सायरन बजने लगा, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बस के अंदर यात्रियों का दम घुटने लग गया। घटना सुबह करीब 10:30 बजे कुंभा मार्ग के पास की है। दरअसल, बस चलते-चलते अचानक रुक गई और उसके बाद गेट लॉक हो गए। तेज सायरन बजने लगा। ड्राइवर को भी शुरुआत में समझ नहीं आया कि आखिर बस में क्या खराबी आई है। काफी मशक्कत के बाद ड्राइवर की ओर वाले गेट को खोलकर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाद में मौके पर पहुंचे मैकेनिक ने तकनीकी समस्या दूर कर बस को आधे घंटे बाद रवाना किया गया। पैनिक बटन दबने से सक्रिय हुआ इमरजेंसी सिस्टम प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बस में लगे पैनिक एसओएस (SOS) इमरजेंसी बटन के दब जाने से यह स्थिति बनी। इलेक्ट्रिक बसों में सुरक्षा के लिहाज से पैनिक बटन लगाए गए हैं। बटन सक्रिय होने के बाद बस का इमरजेंसी सिस्टम चालू हो गया, जिससे सायरन बजने लगा और गेट लॉक हो गए। मौके पर पहुंचे मैकेनिक ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी समस्या समझ नहीं आई। बाद में पैनिक बटन को दोबारा सक्रिय कर सिस्टम को री-सेट किया गया, जिसके बाद बस सामान्य रूप से संचालित होने लगी। यात्रियों में घबराहट, सड़क पर करना पड़ा इंतजार बस में सफर कर रहे यात्री अक्षय ने बताया कि बस अचानक चलते-चलते बंद हो गई। इसके बाद तेज आवाज आने लगी और सभी यात्रियों को बस से उतार दिया गया। यात्रियों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। बस बंद होने के बाद यात्रियों को सड़क किनारे इंतजार करना पड़ा। बाद में कंडक्टर ने दूसरी बस को रोक कर यात्रियों को रवाना किया। ड्राइवर बोला- ऐसी स्थिति से निपटने की जानकारी नहीं दी गई थी बस ड्राइवर हेमंत ने बताया कि किसी यात्री ने संभवतः पैनिक बटन दबा दिया था, जिसके कारण तेज सायरन बजने लगा और बस के गेट लॉक हो गए। बस के भीतर घुटने जैसी स्थिति बनने पर उन्होंने अपने पास मौजूद इमरजेंसी बटन दबाया, जिसके बाद गेट खुले और यात्रियों को बाहर निकाला जा सका। उन्होंने कहा कि बस संचालन की ट्रेनिंग तो दी गई थी, लेकिन यदि पैनिक बटन सक्रिय हो जाए और ऐसी स्थिति बने तो उससे निपटने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया था। बाद में मैकेनिक को बुलाकर समस्या का समाधान कराया गया। हाल ही में शुरू हुई हैं नई इलेक्ट्रिक बसें राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत हाल ही में जयपुर में 29 और भीलवाड़ा में 18 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने शनिवार 20 जून को जयपुर में इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीलवाड़ा में भी 18 इलेक्ट्रिक बसों का शुभारंभ किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा था कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई है, जिससे शहरी परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने खुद किया था बस में सफर अमर जवान ज्योति पर आयोजित कार्यक्रम में बसों के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने स्वयं इलेक्ट्रिक बस में सफर कर उसकी सुविधाओं का जायजा लिया था। उन्होंने अमर जवान ज्योति से स्टेट हैंगर तक यात्रा की और बसों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पैनिक बटन, सीसीटीवी कैमरे, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली थी। राजस्थान को मिलेंगी 1150 इलेक्ट्रिक बसें प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर का चयन किया गया है। केंद्र सरकार ने इन आठ शहरों के लिए 675 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त 475 और बसों की भी स्वीकृति मिल चुकी है। इस प्रकार राजस्थान को कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलने जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य पहले चरण में दीपावली तक 675 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करना है। यात्रियों के लिए सुविधाएं 9 मीटर लंबाई वाली ये एयर कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसें सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक संचालित की जा रही हैं। न्यूनतम किराया 15 रुपए निर्धारित किया गया है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं तथा महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि संचालन शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सामने आई इस तकनीकी गड़बड़ी ने बसों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि पैनिक बटन दबने पर ऐसी स्थिति बनती है तो चालक और परिचालन स्टाफ को इससे निपटने की पूरी जानकारी और ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
