जैसलमेर शहर में मंगलवार को जैन समाज की 250 साल पुरानी ऐतिहासिक बिल्डिंग धराशायी हो गई। इमारत के पास में ही एक दूसरी बिल्डिंग में अवैध बेसमेंट बनाने के लिए खुदाई की जा रही थी, जिसके कारण ऐतिहासिक बिल्डिंग कमजोर होकर ढह गई। हादसा दोपहर करीब साढ़े 3 बजे हुआ। पड़ोसी हर्ष जैन ने बताया कि ढहने वाली बिल्डिंग का नाम ‘उपासरा’ है, जो ऐतिहासिक पटवा हवेली के ठीक पीछे स्थित है। यह जैन ट्रस्ट के अधीन है। उन्होंने बताया कि मुंबई के एक कारोबारी की ओर से जैन समाज के उपासरा के पास ही अवैध बेसमेंट बनाया जा रहा था। इसके लिए करीब 15 फीट गहरी खुदाई की जा चुकी थी। इसी कारण इसकी नींव कमजोर हुई और ऐतिहासिक इमारत दोपहर होते- होते अचानक ढह गई। गनीमत रही कि बेसमेंट खुदाई के दौरान करीब 10 मजदूर भी काम कर रहे थे, जिन्होंने मिट्टी और चूना गिरता देख भाग कर अपनी जान बचाई। इससे बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल पुलिस ने एहतियात के तौर पर गली में आवाजाही बंद कर दी है। साथ ही इमारत के पास रहने वाले 2 पड़ोसियों को दूसरी जगह शिफ्ट होने के निर्देश दिए हैं। अब देखिए- हादसे की PHOTOS
अंडरग्राउंड खुदाई बनी हादसे का कारण
जैसलमेर नगर परिषद के राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि राखेचा पाड़ा इलाके में जैन ट्रस्ट का उपासरा इमारत है, इसके पास अवैध अंडरग्राउंड बनाने के कारण हादसा हुआ। इस खुदाई की किसी प्रकार की परमिशन नहीं दी गई थी। खुदाई के कारण ऐतिहासिक इमारत की नींव कमजोर हो गई और आखिरकार वह भरभराकर ढह गई। सूचना मिलते ही नगर परिषद की टीम और शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। थानाधिकारी बोले- दो परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कहा है
कोतवाली थानाधिकारी सुरजाराम जाखड़ का कहना है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की गई और ढही हुई बिल्डिंग के पास रहने वाले पड़ोसी नमन भाटिया और मांगीलाल जैन के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हादसे वाले रास्ते पर लोगों की आवाजाही को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया है। जबकि निर्माणाधीन स्थल और प्रभावित क्षेत्र को भी सीज कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की देखरेख में मौके से मलबा हटाया जा रहा है। जैन ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है, जिससे वे बिल्डिंग का मलबा समय से हटा सके। जबकि अवैध गतिविधि करने वाले व्यक्ति को आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया(ASI) की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा, क्योंकि यह ऐतिहासिक धरोहर के साथ अवैध निर्माण और छेड़छाड़ का मामला भी है। जैन समाज का प्राचीन उपासरा था
पड़ोसी हर्ष जैन ने बताया कि ढहने वाली बिल्डिंग जैन समाज के साधु-साध्वियों के लिए उपासरा थी। वे चातुर्मास या प्रवास के दौरान यहां निवास करते थे, धर्म पर उपदेश देते थे और श्रद्धालुओं को धार्मिक शिक्षा भी यहां प्रदान की जाती थी। फिलहाल चूना- पत्थर झड़ने के कारण इसे गोदाम में बदल दिया गया था, जहां जरूरी सामान रखा हुआ था। हालांकि फिलहाल जान-माल की हानि नहीं हुई है।