उदयपुर में सामूहिक धर्मांतरण मामले के 11 आरोपियों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। खेरवाड़ा के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने शनिवार को सभी आरोपियों की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। पीठासीन अधिकारी जगदीश कुन्तल ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। पूरा मामला ऋषभदेव थाना इलाके के कानूवाड़ा बिलखाई गांव का है। 6 जून 2026 को पुलिस ने प्रार्थना सभा में धर्म परिवर्तन करवाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने साफ कहा- किसी को लालच देकर या जबरन धर्म बदलवाना देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए बेहद खतरनाक है। घर पर नया कुआं और हैंडपंप खुदवाने का प्रलोभन बिलखाई निवासी पीड़ित नानालाल ने ऋषभदेव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने उसे ईशा भगवान की प्रार्थना सभा के नाम पर बुलाया। वहां पहले से करीब 150 से 200 लोग मौजूद थे।नानालाल को ईसाई धर्म अपनाने पर उसकी बीमारी ठीक करने, घर पर नया कुआं और हैंडपंप खुदवाने का प्रलोभन दिया गया था। जब नानालाल ने धर्म बदलने से साफ मना कर दिया, तो आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की। पुलिस ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2025 के तहत केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वकील का तर्क- आपसी विवाद में फंसाया गया कोर्ट में शनिवार को आरोपियों के वकील रवि भावा ने तर्क दिया कि आपसी विवाद में फंसाया गया है। वहीं परिवादी पक्ष के वकील नरेंद्र शर्मा, भावेश शर्मा, केके मेहता, पुष्पेंद्र त्रिपाठी और राजकुमार शर्मा ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया- आरोपियों ने बिना किसी सरकारी अनुमति के सार्वजनिक ग्राउंड पर लाउडस्पीकर लगाकर बड़ी सभा की। गरीब और आदिवासी वर्ग के लोगों को चमत्कार और पैसों का लालच देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। पुलिस को मौके से ईसाई धर्म की 17 किताबें, सीडी और फोटोग्राफ भी मिले हैं, जिसमें नाबालिग बच्चे भी शामिल दिख रहे हैं। सबको अपने धर्म को मानने की आजादी है कोर्ट ने केस डायरी और सबूतों को देखने के बाद आरोपियों को राहत देने से साफ मना कर दिया। जज जगदीश कुन्तल ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सबको अपने धर्म को मानने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कोई दूसरों को प्रलोभन देकर या नीचा दिखाकर जबरन धर्म बदलवाए और उनकी आस्था को ठेस पहुंचाए। चूंकि पीड़ित अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) वर्ग से है। सभा में बच्चे भी थे, इसलिए नए कानून के तहत इसमें 20 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। छोड़ने से गवाहों को डराने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका कोर्ट ने कहा- अभी जांच चल रही है, ऐसे में आरोपियों को छोड़ने से गवाहों को डराने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है। कोर्ट ने डूंगरपुर के हरीश, उदयपुर के भैरूलाल, छत्तीसगढ़ भिलाई के अमित कुमार, पलाश, आशीष सहित स्थानीय आरोपी बाबूलाल, शंकरलाल, राकेश, अनिल, नारायण और दिनेश की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। — ये खबर भी पढ़ें… 20 गांवों के आदिवासियों का करवा रहे थे धर्म परिवर्तन:छत्तीसगढ़-झारखंड के 3 पादरियों सहित 11 हिरासत में; 2 दिनों से चल रही थी सभा धर्म परिवर्तन मामले में 3 पादरी सहित 11 गिरफ्तार:आदिवासियों को लालच-झांसा देने का आरोप; आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही पुलिस पैसों का लालच देकर धर्म परिवर्तन करा रहे:चर्च-प्रार्थना सभा में नहीं पहुंचने पर धमकाते थे; 50 गांवों में 10 साल से चल रहा नेटवर्क