चित्तौड़गढ़ में एक महिला की सजगता से 1 लाख रुपए की साइबर ठगी होने के बाद रमक को होल्ड किया जा सका। महिला को साइबर ठग ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया था। OTP बताने के बाद महिला के क्रेडिट कार्ड खाते से ट्रांजैक्शन हो गया। उसने 1930 पर कॉल कर रकम को होल्ड करा दिया। एसपी धर्मेंद्र यादव ने बताया- महिला के पास 10 जुलाई को एक कॉल आया था। कॉलर ने खुद को क्रेडिट कार्ड कंपनी का कर्मचारी बताया। कहा- आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट शुरू करनी है। आपके पास बैंक के प्रतिनिधि का फोन आएगा। उसके निर्देशों का पालन करना होगा। ठग ने दूसरे नंबर से किया कॉल कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान ओटीपी ले लिया। दो सप्ताह बाद 23 जुलाई को महिला के क्रेडिट कार्ड का बिल जब 1.02 लाख रुपए पहुंचातो उसे पता चला कि उसके कार्ड से ट्रांजैक्शन कर दिए गए हैं। ठगी का एसहास होने पर महिला ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना चित्तौड़गढ़ की टीम तुरंत सक्रिय हुई। उन बैंक खातों तक पहुंच बनाई जहां राशि ट्रांसफर हुई थी। पुलिस ने संबंधित बैंकों के नोडल अधिकारियों से कॉर्डिनेट कर खातों को फ्रीज कराया और पूरी राशि होल्ड करवा दी। आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला को उसकी रकम वापस दिलाई जाएगी। समय पर शिकायत बनी सबसे बड़ी राहत एसपी धर्मेंद्र यादव ने बताया- हाल ही साइबर वित्तीय अपराध के मामलों में ई-जीरो FIR की सीमा 5 लाख रुपए से घटाकर 1 लाख रुपए किया गया है। इसलिए मामला सीधे साइबर थाना चित्तौड़गढ़ पहुंच गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के सुपरविजन में साइबर थाना प्रभारी मनीष शर्मा और उनकी टीम ने इस मामले में तुरंत जांच शुरू की। पुलिस की अपील, ओटीपी कभी साझा नहीं करें साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक, क्रेडिट कार्ड या केवाईसी के नाम पर मांगी गई जानकारी और ओटीपी कभी साझा नहीं करें। किसी भी कस्टमर केयर का नंबर हमेशा संबंधित बैंक या कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही लें। अनजान लिंक पर क्लिक करने या बिना जानकारी के कोई ऐप डाउनलोड करने से भी बचें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देर किए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
