पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर सियासी हमला बोला है। गहलोत ने कहा- 25 सितंबर 2022 की बगावत सचिन पायलट के खिलाफ थी, हाईकमान के खिलाफ नहीं थी। उन्होंने कहा- अगर मैं बगावत करता तो हाईकमान मुझे मुख्यमंत्री रखता क्या? पायलट ने सच्चाई स्वीकार करना सीखा नहीं। उन्होंने गलती की है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। इसलिए इश्यू आज तक बना हुआ। पायलट मेरी फॉरगेट एंड फॉरगिव की भावना को समझ जाते तो मानेसर का मुद्दा जिंदा नहीं रहता। गहलोत ने रविवार को जयपुर में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में मीडिया से ये बात कही। मुझे बदनाम कर दिया कि मुख्यमंत्री रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने
गहलोत ने कहा- जिस पद पर पंडित नेहरू रहे हों और सोनिया गांधी मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनाती तो क्या मैं मना करता? वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक षड्यंत्र था। अचानक ऑब्जर्वर आ गए, तमाशा हो गया। बदनाम मैं हो गया। विधायकों ने कहा था- पायलट मुख्यमंत्री मंजूर नहीं होंगे, ये मानेसर ले जाने वालों में थे
गहलोत ने कहा- 25 सितंबर की घटना उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी, जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया। ऐसा माहौल बन गया कि 100 विधायक इकट्ठे हो गए। विधायकों ने कहा था- अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए। नया मुख्यमंत्री बने तो उनमें से बने, जिन्होंने हाईकमान के साथ लॉयल्टी दिखाई। हम होटलों में बंद रहे हैं, सरकार बचाई। हम 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, हमें मंजूर है। लेकिन पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे, क्योंकि वो तो मानेसर ले जाने वालों में थे। मैं बगावत करता तो हाईकमान मुझे मुख्यमंत्री क्यों रखती?
गहलोत ने कहा- ये विधायकों की मांग थी, उसको तोड़-मरोड़कर कहा कि हाईकमान के खिलाफ रिवोल्ट (विरोध) हो गया। अरे हाईकमान के खिलाफ बगावत होती तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या? अगर हम बगावत करते तो हाईकमान मुझे मुख्यमंत्री क्यों रखती? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए। विधायक पायलट के पास क्यों नहीं गए? ये बात पायलट को समझनी चाहिए
गहलोत ने कहा- हिंदुस्तान के इतिहास में जब कभी भी हाईकमान ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं तो 90% MLA पुराने सीएम को छोड़ नए बनने वाले के पास चले जाते हैं। उन्हें पता होता है कि उनके काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे। ये तो मैंने देखा है, कोई नहीं रुकता है। गहलोत ने कहा- क्या कारण था उस दिन नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा। खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया। उसके बाद उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? मान लीजिए वो तो शपथ लेने वाले थे। जाते उनके पास। पायलट को आज भी बच्चे की तरह मानता हूं, इन्हें पता नहीं कौन गाइड कर रहा
गहलोत ने कहा- ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए। उनको भी कई अनुभव प्राप्त हो चुके हैं। हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं। हम तो बचपन से स्नेह रखते हैं, इनके परिवार में आते-जाते थे। पायलट को कभी प्रधानमंत्री, कभी कांग्रेस अध्यक्ष का उम्मीदवार बता देते हैं
गहलोत ने कहा- मीडिया का एक वर्ग ऐसा है, जो कभी पायलट साहब को प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं। ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं। कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेसिडेंट के उम्मीदवार हैं। कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेसिडेंट बनने जा रहा है। कभी कहते हैं ये जीएसओ बनने जा रहे हैं। कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? पायलट को गलती स्वीकार करनी चाहिए
गहलोत ने कहा- मैं कहना चाहूंगा पायलट साहब को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए। गलती इंसान से ही तो होती है, मैं भी कर सकता हूं। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए। जब तय हो गया था कि ये लोग भी आ रहे हैं। आते ही मैंने बयान दिया था कि ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’। सचिन पायलट अगर उस दिन मेरी भावना समझ जाते, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते। मैंने ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी। मैंने कहा ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’, मतलब जिसने गलतियां की, आपस में गलतियां कीं। सब भूलो और माफ करो। उनको वो बात भी अगर समझ में नहीं आई, उसमें मेरा क्या कसूर है? मानेसर का इश्यू खत्म करने पायलट का बयान क्यों नहीं आया?
गहलोत ने कहा- मैंने बीकानेर में 6 महीने पहले कहा था भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भाई चलो ये इश्यू खत्म हो गया, क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे। उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इश्यू बना रहता है। हम नहीं चाहते इश्यू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है। लेकिन जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे तो भाई आप जानते हो इश्यू तो बना ही रहता है। मैं नहीं चाहता इश्यू बना रहे। मैंने पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद की
गहलोत ने कहा- इनको (पायलट को) केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद की। उन्होंने अपनी जुबान से ये कभी नहीं कहा। इस बात की मुझे शिकायत भी है। उन्हें मालूम है कि मैंने उनकी मदद की है। उनका फोन आया तो मैंने कहा आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है, हम लोगों को भी। पायलट अपने दोस्तों से भी कहते कि गहलोत ने मदद की तो मेरा दिल भर जाता
गहलोत ने कहा- भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते कि हां भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद की थी, तो मेरा दिल भर जाता। उन्होंने ये बात क्यों नहीं कही? जब मुझसे वो फोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो। मैं मदद करके आ गया तो क्या उनका धर्म नहीं था कहने का? भाई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी। हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, वो कुछ तो कहते
गहलोत ने कहा- ठीक है, आज हमारी आपस में गलतफहमी हो गई। वो कुछ तो कहते। ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं। दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। राहुल गांधी अभी जूली-डोटासरा की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे
गहलोत ने कहा- पायलट साहब हों, डोटासरा, जूली या चाहे कोई नेता हों। सबको हम तो यही कहेंगे भाई, सब लोग मिलकर चलो। राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमान राहुल गांधी के दिमाग में ऐसा है, जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं। गहलोत ने कहा- राहुल गांधी अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे। अच्छा काम आप लोग कर रहे हो। अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? गजेंद्र शेखावत घबराया हुआ आदमी, अपना मंत्री पद बचाए
गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर पलटवार करते हुए कहा- गजेंद्र शेखावत तो घबराया हुआ आदमी है। पता नहीं वह कब तक मंत्री रहेगा, उसे ही नहीं मालूम है। उसे चाहिए कि वह अपना मंत्री पद बचाए, पता नहीं कब छुट्टी हो जाए। उसके जो कारनामे थे, हाईकोर्ट से उसे रिलीफ नहीं मिली है। वह तो सरकार बदल गई, इसलिए एसओजी ने नई रिपोर्ट दे दी कि केस नहीं बनता। हमने 22 महीने लगाकर जांच करवाई थी। पूरी तकनीकी जांच हुई। हमने सीधे अरेस्ट नहीं किया, हम गलत काम नहीं करते।
