जोधपुर शहर में जगह-जगह फैली गंदगी और कचरे के ढेर को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शहर की सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए अधिवक्ता प्रशांत टाटिया को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। हाईकोर्ट ने कहा- नागरिकों के मौलिक अधिकारों और जन स्वास्थ्य पर खतरा होने की स्थिति में न्यायालय मूकदर्शक नहीं रह सकता। कोर्ट कमिश्नर को शहर का निरीक्षण कर सफाई और नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अगली सुनवाई से पहले अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। कोर्ट में बताया- नगर निगम की लापरवाही से बिगड़ रही है सफाई व्यवस्था न्यायाधीश समीर जैन की एकलपीठ ने अधिवक्ता नमन भंसाली की ओर से दायर सिविल रिट याचिका पर नगर निगम सहित संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शीतल कुम्भट और अभिषेक मेहता ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम की कथित लापरवाही के कारण शहर की सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों में मंदिरों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पतालों, सार्वजनिक सड़कों और ऐतिहासिक दरवाजों के आसपास कचरे के ढेर और गंदगी को भी बताया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वच्छ वातावरण में जीवन जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मानसून में गंदगी और जलभराव से डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कोर्ट कमिश्नर का 50 हजार रुपए का पारिश्रमिक नगर निगम वहन करेगा।