खैरथल-तिजारा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी आय में बड़ा इजाफा कर रहे हैं। बंजर और कम उपजाऊ जमीन अब किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनती जा रही है। सोलर प्लांट से बन रहे आत्मनिर्भर प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत जिले में स्थापित सोलर प्लांट किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं। जिले के मातौर गांव में 11 बीघा जमीन पर स्थापित 2 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट इसकी बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है, जहां से किसान को हर महीने करीब 10 लाख रुपए तक की आय हो रही है। 24 स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित जेवीवीएनएल के कनिष्ठ अभियंता ने बताया- जिले में पीएम कुसुम योजना के तहत 24 स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों से न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत भी मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 1 मेगावाट क्षमता का प्लांट प्रतिदिन लगभग 5 हजार से 5,500 यूनिट बिजली उत्पादन करता है। ऐसे में 2 मेगावाट का प्लांट रोजाना करीब 10 हजार यूनिट बिजली तैयार कर सकता है, जिससे किसान को प्रतिदिन लगभग 30 हजार रुपये तक की आय संभव है। चंचल कुमार ने 11 बीघा जमीन पर 2 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया मातौर निवासी सोलर प्लांट संचालक चंचल कुमार ने बताया-उन्होंने पीएम कुसुम योजना के तहत अपनी 11 बीघा जमीन पर 2 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया है। इस प्लांट से बनने वाली बिजली विद्युत निगम को बेची जाती है, जिससे उन्हें हर महीने 10 लाख रुपए से अधिक की आमदनी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की रियायती ऋण योजनाओं और तकनीकी सहयोग के कारण सोलर प्लांट स्थापित करना पहले की तुलना में काफी आसान हुआ है। अधिकारियों के अनुसार किसानों के पास उपलब्ध जमीन के अनुसार 2, 3 और 5 मेगावाट क्षमता तक के सोलर प्लांट लगाए जा सकते हैं। पीएम कुसुम योजना के कॉम्पोनेंट-A के तहत 0.5 से 2 मेगावाट और कॉम्पोनेंट-C के तहत 2 से 5 मेगावाट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। बिजली विभाग किसानों से प्रति यूनिट लगभग 3 रुपये की दर से बिजली खरीदता है, जिससे किसानों को नियमित आय प्राप्त हो रही है।
