जोधपुर के पहाड़ी इलाकों पर सेना ने कारगिल के ‘टाइगर हिल युद्ध’ जैसा दृश्य दिखाते हुए सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस दौरान हथियार लिए जवानों ने पहले पहाड़ी इलाके में चढ़ाई की। इसके बाद दुश्मन को हराकर चौकी पर कब्जा किया। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर रविवार को जोधपुर में “ऑपरेशन विजय कारगिल-2026 सम्मान समारोह” के दौरान यह दृश्य दिखा। क्रीड़ा भारती जोधपुर प्रांत के तत्वावधान में रावटी, घोड़ा घाटी, मेहरानगढ़ फोर्ट रोड पर आयोजित समारोह में आम लोग, पूर्व सैनिक आदि शामिल हुए। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- कारगिल विजय भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। राज्यपाल ने कहा कि कारगिल के वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। देंखे समारोह से जुड़े PHOTOS…
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे और आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राजस्थान ने कारगिल युद्ध में असाधारण वीरता का परिचय देने वाले 16 वीर सैनिकों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया। शेखावत ने कहा कि हम सभी यहां उस स्वर्णिम इतिहास को अपनी आंखों के सामने पुनः जीवंत करने और उससे प्रेरणा लेने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसे हमारे वीरों ने अपने रक्त से लिखा था। कारगिल युद्ध ने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत शांति का उपासक तो है, लेकिन यदि कोई हमारी संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देगा तो देश अपने सैनिकों की ताकत के बल पर हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देना जानता है। इतिहास अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की आधारभूमि इतिहास और संस्कृति की रक्षा पर बल देते हुए शेखावत ने कहा कि किसी भी देश के लिए इतिहास केवल अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की आधारभूमि होता है। जब हम इतिहास की घटनाओं को केवल पुस्तकों में पढ़ने के बजाय अपनी आंखों के सामने जीवंत देखते हैं तो वह आने वाली पीढ़ियों के मानस पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। जो समाज अपने राष्ट्रनायकों का सम्मान करना बंद कर देता है, वह अपनी जड़ों और प्रेरणास्रोतों से दूर हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ते हुए शेखावत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही नहीं करते। प्रयोगशाला में काम करने वाला वैज्ञानिक, स्टार्टअप शुरू करने वाला युवा, संस्कार देने वाला शिक्षक, खिलाड़ी तैयार करने वाला कोच और निष्ठा से अध्ययन करने वाला छात्र, अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करने वाला हर व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। युद्ध का किया जीवंत प्रदर्शन समारोह का मुख्य आकर्षण कारगिल युद्ध का जीवंत मंचन रहा। युद्ध के रोमांचक और भावनात्मक दृश्यों का सजीव प्रदर्शन ने उपस्थित लोगों को कारगिल के रणबांकुरों की वीरगाथा से रूबरू कराया। देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने कारगिल की प्रमुख चोटियों पॉइंट 5140, पॉइंट 4875, पॉइंट 5353 और टाइगर हिल पर हुए भीषण संघर्ष और भारतीय सेना की विजय गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने आयोजन की सफलता के लिए क्रीड़ा भारती व आयोजन समिति का आभार जताया और व्यस्तता के बावजूद कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक व जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय मंत्री राज चौधरी, प्रांत अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह जोधा, महानगर अध्यक्ष वरुण धनाडिया, पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरपत सिंह सहित बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और नागरिक उपस्थित रहे।