सवाई माधोपुर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। जिसका असर रणथंभौर टाइगर रिजर्व बाघ के वन्यजीवों पर भी दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में फलौदी रेंज में दुर्लभ प्रजाति के एक वल्चर यानी गिद्ध को घायल अवस्था में पाया गया। भीषण गर्मी और हीट स्ट्रेस के कारण यह पक्षी घायल और कमजोर हो गया था। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी जसकरण मीणा ने तत्परता दिखाते हुए वल्चर का रेस्क्यू किया। जिसे रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ हॉस्पिटल लाया गया और उपचार किया गया। वल्चर को फ्लूड थैरेपी, आक्सीजन, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स दिए उप निदेशक पशुपालन डॉ. चन्द्र प्रकाश मीणा ने बताया कि हॉस्पिटल में वल्चर को लाने के दौरान उसकी स्थिति काफी नाजुक थी। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उसका थर्मो रेग्युलेशन किया ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही फ्लूड थैरेपी, आक्सीजन, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स दिए गए। वल्चर को विशेष वातानुकूलित चेम्बर में रखा गया, जहां लगातार तापमान नियंत्रण के साथ उसकी निगरानी की गई। डॉ. मीणा ने बताया कि उपचार का सकारात्मक असर देखने को मिला है। वल्चर ने अब मीट को आहार के रूप में खाना शुरू कर दिया है और उसके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वल्चर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल अत्यंत महत्वपूर्ण पक्षी है। गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी माने जाते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह मृत पशुओं के अवशेषों का निस्तारण कर बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं। एन्थ्रेक्स, रेबीज और बोटूलिज्म जैसे खतरनाक रोगों के नियंत्रण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में भी वल्चर योगदान देते हैं। इस उपचार और संरक्षण कार्य में जीत सिंह, फरहान, खेमराज, बलराम तथा चतुर्भूज मीणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
