स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अपने विशिष्ट सहायक को हटाने की मांग पूरी नहीं होना, सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। गजेंद्र सिंह अपने विशिष्ट सहायक (RAS) बलवंत सिंह लिग्री को हटाकर उनकी जगह विभु कौशिक (RAS) को लगाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सीएम भजनलाल शर्मा को चिट्ठी भी लिखी थी। चिट्ठी लिखने के करीब 5 महीने बाद 13 मई को 187 आरएएस अफसरों की तबादला सूची जारी तो हुई। लेकिन इस फेरबदल के बावजूद उनके विशिष्ट सहायक को नहीं बदला गया। एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार मंत्री के पसंद के अफसरों को ही विशिष्ट सहायक लगाती रही है। आखिर क्या वजह है कि मंत्री की मांग को अस्वीकार किया गया? क्या इसमें मुख्यमंत्री ने कोई सख्त संदेश दिया है? पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी… जानिए कौन है बलवंत सिंह लिग्री? जिसे मंत्री हटाना चाहते हैं आखिर क्यों लिग्री को हटाना चाहते हैं मंत्री? स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अपने विशिष्ट सहायक बलवंत सिंह लिग्री को हटाने की वजह नहीं बताई है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री उनकी कार्यशैली से नाखुश हैं। नियमों की सीमा में रहकर काम करते हैं। प्रक्रियाओं पर सख्ती से टिके रहते हैं। इसलिए स्वास्थ्य मंत्री के करीबी लोग नाराज रहते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने CM को 1 जनवरी, 2026 को चिट्ठी में लिखा था- ‘डॉ. विभु कौशिक, आरएएस वर्तमान में अतिरिक्त निदेशक प्रशासन राज्य बीमा एंव प्रावधायी निधि विभाग के पद पर पदस्थापित हैं। निवेदन है कि कौशिक का पदस्थापन मेरे विशिष्ट सहायक के पद पर करवाकर अनुग्रहित करें। स्वास्थ्य मंत्री की चिट्ठी का जवाब संयुक्त सचिव (प्रशासनिक सुधार) मुख्यमंत्री अंजू राजपाल ने 6 फरवरी 2026 को दिया। जिसमें लिखा- नियमानुसार आगामी कार्यवाही के लिए पत्र भेज दिया गया है। बलवंत सिंह लिग्री क्या बोले- मेरा मंत्री से कोई विवाद नहीं है। क्यों हटाना चाहते हैं? मुझे नहीं पता। मैं मेरा काम पूरी इमानदारी से करता हूं। सरकार जहां भी तबादला करेगी। वहीं काम करेंगे। इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं कहना है। इस मामले में हमने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जानिए कौन है विभु कौशिक? जिन्हें लगाना चाहते हैं स्वास्थ्य मंत्री बलवंत सिंह लिग्री के स्थान पर विभु कौशिक को लगाना चाहते हैं। विभु कौशिक 2006 बैच के आरएस अफसर हैं। वसुंधरा राजे सरकार (2013-2018) में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बाबूलाल वर्मा के विशिष्ट सहायक थे। एसडीओ जयपुर प्रथम भी रह चुके हैं। विभु कौशिक उस समय सुर्खियों में आए थे तब तत्कालीन राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड की एमडी आईएएस नेहा गिरी ने उन्हें अप्रैल, 2025 में एक मामले में चार्जशीट जारी कर दी थी। लंबे इंतजार के बाद तबादले, लेकिन लिस्ट में नाम नहीं सरकार ने लंबी प्रतीक्षा के बाद 13 मई को 187 आरएएस अफसरों की तबादला सूची जारी की। आमतौर पर तबादलों में जनप्रतिनिधियों को उनकी पसंद के अफसर लगाए जाते हैं या फिर विवाद वाले अफसरों को हटाकर इधर-उधर किया जाता है। इस तबादला सूची में मुख्यमंत्री ने विवाद में रहे वाले गोपालन विभाग के निदेशक पंकज कुमार ओझा का तबादला अतिरिक्त निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पद पर कर दिया। देवस्थान विभाग की मीटिंग के बाद वॉट्सएप ग्रुपों में फैले संवेदनशील मैसेज से सरकार की काफी फजीहत हुई थी। पंकज ओझा जहां भी रहे विवाद होते रहे। खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय में तैनाती के दौरान एक आईपीएस ने उन पर मिलावटखोर से सांठगांठ का आरोप लगाया था। अफसरों को हटाने के लिए पहले भी लिखी गई थी सीएम को चिट्ठी राजस्थान में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पसंद के अफसर लगाने और हटाने की मांग कोई नई नहीं है। मौजूदा सरकार में पहले भी केंद्रीय मंत्री और सांसद ऐसी मांग कर चुके हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधि के कहने पर किसी भी किसी भी अफसर का तुंरत ही तबादला नहीं किया। 1. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 13 सितंबर, 2025 को तत्कालीन जोधपुर ग्रामीण एसपी नारायण टोगस को हटाने के लिए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। पत्र में लिखा था- मेरे संसदीय क्षेत्र जोधपुर में पदस्थापित नारायण टोगस जोधपुर ग्रामीण एसपी, से मेरे कार्यालय द्वारा क्षेत्र की कानून व्यवस्था तथा स्थानीय क्षेत्र में मेरे प्रस्तावित दौरों से संबंधित प्रोटोकॉल सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए बार-बार संपर्क किया गया। मिलने के लिए निर्धारित बैठक का अग्रिम कार्यक्रम की भी सूचना दी गई। एक माह बाद भी टोगस द्वारा मेरे कार्यालय से संपर्क नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार की सूचना प्रदान की गई। ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही फिर न हो। 2. सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने तत्कालीन राजसमंद एसपी ममता गुप्ता को निलंबित करने और विभागीय जांच के आदेश देने के लिए मुख्यमंत्री को दो पत्र लिखे थे। पहला- 24 दिसंबर, 2025 और दूसरा 7 जनवरी 2026 को लिखा। सांसद का आरोप था कि राजसमंद एसपी उनकी बात नहीं मानती है। मनमानी करती हैं। सांसद का कहना था कि राजसमंद के नाथद्वारा में 2 मार्च 2025 की शाम गणेश टेकरी क्षेत्र में 4 दोस्तों के बीच नशा करने के दौरान एक युवक (अक्षय कुमावत) को पिस्टल से गोली मारी थी। जिससे वह गंभीर घायल हो गया। सांसद का आरोप था कि एसपी द्वारा इस संवेदनशील मामले को दबा दिया गया। जिससे दोषियों को संरक्षण मिला। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल एक्सपर्ट महेश चंद शर्मा का कहना है कि सरकार अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना चाहती है। यह जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। प्रशासन से सरकार को काम लेना होता है। इसी प्रक्रिया में तबादले किए जाते हैं। तबादला करने में राजनीति नहीं होती है। बदलाव की जो चेष्टा की जाती है उसका मुख्य कारण अच्छा प्रशासन देना होता है। मंत्री ने जो तबादले की मांग की है वह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। …. ये खबर भी पढ़िए… उदयपुर में 7 RAS अधिकारियों को मिली नई पोस्टिंग:प्रभा गौतम को आबकारी विभाग में अतिरिक्त आयुक्त लगाया,जानिए किसे-कौन सी जिम्मेदारी मिली
राज्य सरकार ने बुधवार रात को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के 187 अधिकारियों का तबादला किया। इसमें उदयपुर जिले में कुछ अफसरों के तबादले किए गए तो कुछ को यहां पर लगाया गया…(CLICK करें)
