बालोतरा जिले के पादरू क्षेत्र में भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए सदियों पुराने देसी नुस्खों का उपयोग किया जा रहा है। इन दिनों “केवला के फूल” लोगों के लिए राहत का प्रमुख साधन बने हुए हैं, जिन्हें स्थानीय लोग “मारवाड़ का कूलर” भी कहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही गांवों और कस्बों में युवा इन फूलों को टेंपो में भरकर बेचते नजर आ रहे हैं। मारवाड़ में वर्षों से हो रहा उपयोग पादरू क्षेत्र के सेला गांव निवासी केवला फूल विक्रेता सावला राम राणा ने बताया कि यह पारंपरिक उपाय वर्षों से मारवाड़ में अपनाया जा रहा है। उनके अनुसार, मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर उसमें केवला के फूल डाले जाते हैं। कुछ समय बाद जब फूल पूरी तरह भीग जाते हैं, तब उस पानी और भीगे हुए फूलों को नहाने से पहले शरीर पर लगाकर मालिश की जाती है। लू लगने का खतरा कम इस विधि से शरीर की गर्मी कम होती है और लू लगने का खतरा घट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि केवला के फूल घमौरियों और गर्मी से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं में भी राहत प्रदान करते हैं। इन्हें शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में उपयाेगी माना जाता है, जिससे यह भीषण गर्मी वाले इलाकों में एक प्राकृतिक और सस्ता उपचार बन गया है। 10 से 20 रुपए में बिकती एक थैली सावला राम ने यह बताया कि कि जेठ और बैसाख के महीनों में इन फूलों को तोड़कर सुखा लिया जाता है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही इन्हें गांव-गांव घूमकर बेचा जाता है। एक थैली 10 से 20 रुपये तक में बिकती है, जिससे विक्रेता प्रतिदिन लगभग 700 से 1000 रुपये तक की इनकम हो जाती है।
