कोटा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के नए अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद किडनी इंफेक्शन का एक और मामला सामने आया है। वहीं, एक नवजात की मौत भी हो गई है। बता दें कि इससे पहले कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। इनमें से दो की मौत हो गई। बाकी चार में से तीन को डायलिसिस पर लिया गया है। दरअसल, जिस महिला किरण (26) की किडनी में इंफेक्शन मिला है, उसकी डिलीवरी हुई थ। इसके बाद उसकी तबियत खराब होना शुरू हुई। उसके भी यूरिन आऊटपुट बंद हो गया। जब हालत बिगड़ने लगी तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने हाथ खडे़ कर दिए। घरवालों से प्राइवेट अस्पताल में ले जाने के लिए कह दिया। महिला का तलवंडी स्थित निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वार्ड में शिफ्ट होने के बाद तबीयत खराब होने लगी किरण के भाई लोकेश ने बताया- मेरी बहन किरण को 5 मई को रात 9 बजे हॉस्पिटल लाया गया था। पहले डॉक्टर्स नॉर्मल डिलीवरी की कहते रहे, लेकिन नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई। 6 मई की रात को करीब 10 बजे उसकी सिजेरियन डिलेवरी की गई। इसके बाद से उसकी तबियत ठीक थी। वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन 7 मई को दोपहर बाद उसकी तबियत खराब होने लगी। पहले उसके हाथ पैर तेज दर्द करने लगे। इसके बाद तड़पने लगी थी।डॉक्टर्स को बताया तो उन्होंने ट्रीटमेंट शुरू किया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद यूरिन आना बंद हो गया। रातभर हॉस्पिटल में परेशान होती रही। लेकिन अस्पताल प्रशासन इस मामले को भी दबाने में लगा रहा। डॉक्टर्स ने प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने के लिए कहा शुक्रवार को सुबह डॉक्टर्स ने साफ मना कर दिया कि इनकी हालत खराब है। इन्हें किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाओ। यहां इलाज नहीं हो पाएगा। इसके बाद आनन फानन में घरवाले उसे लेकर तलवंडी स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। यहां महिला की स्थिति को देखते हुए भर्ती कर इलाज शुरू किया। महिला की हालत काफी खराब है। ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिया गया है। डायलिसिस पर लिया गया है। लापरवाही से बच्ची की मौत का आरोप इधर, इसी अस्पताल में 4 मई को एक और महिला का सिजेरियन हुआ। विज्ञाननगर निवासी सपना (28) को चार मई की शाम को 7 बजे गायनिक विभाग में लाया गया था। रात 10 बजे उसकी सिजेरियन से डिलेवरी हुई। उसने बच्ची को जन्म दिया। सपना के पति सागर ने बताया कि डिलेवरी के बाद बच्ची को एनआईसीयू में ले गए। एनआईसीयू में उसे कोई टीका लगाया गया था। इसके कुछ देर बाद बच्ची का शरीर नीला पड़ने लगा था। हमने स्टाफ को कहा तो उन्होंने फिर से बच्ची को एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया। देर रात को तीन बजे कहा- उसके पेट में गंदा पानी चला गया है, उसे दवा देनी पड़ेगी। इसके बाद हमसे कागज पर साइन करवा लिए। इसके बाद 5 मई तक हमें बच्ची को देखने तक नहीं दिया। एनआईसीयू में इलाज की बात कहते रहे। इसके बाद 6 मई को सुबह सात बजे हमें बताया कि बच्ची की धड़कन नहीं चल रही है। सागर ने कहा कि जब हमें दिए जाने तक दो घंटे तक बच्ची ठीक थी तो बाद में अचानक क्या हुआ। पेट में पानी जाता तो दो घंटे में ही असर दिखने लगता। अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही से हमारी बेटी की जान गई है। चार महिलाओं की स्थिति अब भी खराब कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। इनमें से दो की मौत हो गई। बाकी चार में से तीन को डायलिसिस पर लिया गया है। एक महिला की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ है। बता दें कि महिलाओं की 4 मई को सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी हुई थी। इसके बाद सभी की हालत बिगड़ने लगी थी। हॉस्पिटल के एसएसबी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती महिलाओं के बेहतर इलाज के लिए जयपुर से चार डॉक्टरों की टीम भी कोटा पहुंच गई हैं। कलेक्टर भी आज सुबह हॉस्पिटल पहुंचे हैं। संभागीय आयुक्त ने हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही कारण के बारे में पता लग सकेगा। उसके बाद ही हम जिम्मेदारी तय करेंगे। डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने पर महिलाओं की हालत क्या, पढ़िए- चंद्रकला- ऑपरेशन के बाद तेज दर्द होने लगा था सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी के बाद चंद्रकला नाम की महिला का भी बीपी लो और यूरिन बंद हो गया था। हालांकि अब महिला की हालत स्थिर है। महिला ने बताया कि ऑपरेशन के समय कुछ नहीं लगा। ऑपरेशन के कुछ देर बाद तेज दर्द और घबराहट होने लगी थी। उसके बाद क्या हुआ कुछ पता नहीं है। यूरिन नहीं आ रहा था। इसके अलावा कुछ पता नहीं कि मेरे साथ क्या हुआ। मुझे होश नहीं था, अभी पेट में दर्द है लेकिन यूरिन आऊटपुट शुरू हो गया है। धन्नी की हालत गंभीर, ब्लिडिंग हुई थी ज्यादा आईसीयू में भर्ती धन्नी बाई की हालत अभी भी गंभीर ही बनी हुई है। वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही है। ऑपरेशन थियेटर से निकलने के बाद वार्ड में लाए जाने पर उनका काफी ब्लड बह गया था लेकिन किसी ने कोई ध्यान ही नहीं दिया। परिजनों ने विरोध के बाद उसे ऑपरेशन थियेटर में लिया गया और फिर से टांके लगाए गए थे। उनकी भी किडनी फेल हो चुकी है। यूरिन में भी परेशानी है। यूरिन में परेशानी से संक्रमण का खतरा सुशीला और रागिनी के अभी भी यूरिन में परेशानी है। लंबे समय तक यूरिन नहीं निकलने से शरीर में दूसरे संक्रमण का खतरा पैदा कर देता है। एक्सपर्टस के अनुसार- यूरिन शरीर से टॉक्सिन, गंदगी बाहर निकालता है, लेकिन इतने लंबे समय तक यूरिन पास नहीं होने से शरीर में ये टॉक्सिन और नुकसान पहुंचाऐंगे।
कांग्रेस ने किया प्रदर्शन इधर, अस्पताल में हुए घटनाक्रम के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदर्शन किया गया। शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसएसबी ब्लॉक के गेट के बाहर धरना दिया। यहां चूडियां भी अस्पताल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के नाम पर फैंकी गई। इस दौरान बडी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए। — ये खबर भी पढ़िए- सीलन-फंगस वाले वार्ड में भर्ती थीं गर्भवती महिलाएं:कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 2 मौत, कई की हालत गंभीर, दवाओं के सैंपल लिए कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में खुशियां मातम में बदल गई हैं। सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर दो महिलाओं ने दम तोड़ दिया। (पढ़िए पूरी खबर)