चित्तौड़गढ़ शहर के चंदेरिया, पुठोली और रोलहेड़ा क्षेत्र के शराब ठेकेदारों ने बुधवार को आबकारी ऑफिस पहुंचकर अपनी दुकानों की चाबियां विभाग को सौंप दीं। ठेकेदारों का कहना है कि वे पिछले एक साल से इन क्षेत्रों की करीब 10 दुकानों का संचालन कर रहे हैं, लेकिन लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि यह दुकानें शुरू से ही घाटे में चल रही हैं, फिर भी विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें दोबारा लेने और संचालित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ठेकेदारों ने कहा कि वे अब और आर्थिक नुकसान नहीं झेल सकते, इसलिए उन्होंने दुकानें छोड़ने का फैसला लिया। उनका यह भी कहना है कि बार-बार दबाव और मानसिक तनाव के कारण यह स्थिति बनी है, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। ठेकेदार बोले- केस में फंसाने की मिल रही धमकी ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे घाटे की दुकानों को हर हाल में लें। अगर वे इनकार करते हैं तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। रोलहेड़ा निवासी महेंद्र सुहालका ने बताया कि उनकी पत्नी के नाम से दुकानें ली हुई हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा है। उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि चंदेरिया में पड़ी तीन नुकसान वाली दुकानें भी उन्हें लेनी पड़ेगी। साथ ही अधिकारी कभी भी दिन या शाम को आकर जांच करने की बात कहते हैं और माल नहीं उठाने पर कार्रवाई की धमकी देते हैं। जांच के नाम पर दुकानें संचालित करने का बना रहे दबाव महेंद्र सुहालका का कहना है कि रेलवे स्टेशन क्षेत्र में एक अन्य दुकान के माल को ही बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। पिछले महीने 400 पेटी माल भी जबरन दिलवाया गया और गोदाम में माल रखवाया गया। उन्होंने बताया कि लाइसेंस उनके नाम से होने के कारण यह कहा जाता है कि अगर वे बताए अनुसार माल नहीं उठाएंगे तो उनके खिलाफ केस बना दिया जाएगा। आरोप है कि कभी पानी की बोतल या खाने का सामान रखने जैसे मुद्दों को आधार बनाकर कार्रवाई की धमकी दी जाती है। वे पिछले एक महीने से इस तरह की परेशानी झेल रहे हैं। अधिकारियों से शिकायत करने पर भी यही कहा गया कि दुकानें लेनी ही पड़ेगी, नहीं लेने पर परिणाम भुगतने होंगे। पिछले साल हुआ 20 साल का नुकसान इसी तरह, चंदेरिया निवासी ठेकेदार रामचंद्र मेवाड़ा ने बताया कि पिछले साल उन्होंने इन दुकानों का संचालन किया था, जिसमें भारी गारंटी राशि होने के साथ यह घाटे की दुकानें साबित हुईं और उन्हें करीब 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ। अब अधिकारियों द्वारा फिर से इन दुकानों को संचालित करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि वे पहले ही नुकसान झेल चुके हैं और इस साल दोबारा घाटा नहीं उठाना चाहते। उन्होंने बताया कि उनके पास रोलहेड़ा और पुठोली में भी दो दुकानें और भी हैं, जहां अधिकारी पहुंचकर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवर रेट, कम रेट, गोदाम के माल या माल के स्रोत को लेकर झूठे केस बनाने की बात कही जाती है। उन्होंने बताया कि स्टेशन रोड पर संचालित ठेके वालों के बीच जयपुर से आई एक अन्य पार्टी को भी दुकानें दिलवाई गईं और उसे आश्वासन दिया गया कि उसका माल नहीं बिकने पर चंदेरिया से 400 पेटी दिला दी जाएगी। गलत माल रखने की दी धमकी इसी क्रम में अप्रैल माह में उनसे भी 400 पेटी माल दिलवाया गया, जिसे उन्होंने लेकर बेचना शुरू कर दिया। अब वही अधिकारी उन पेटियों को गलत बताते हुए पूछ रहे हैं कि यह माल कहां से आया, जबकि यह माल उन्होंने ही गोदाम से बिल कटवाकर उन्हें सुपुर्द किया था, जिसकी बिल कॉपी उनके पास मौजूद है। अब कहा जा रहा है कि यह माल उनकी दुकान या उनके बैच नंबर का नहीं है, बल्कि दूसरे बैच का है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जबरन बिल काटकर माल दिया गया और अब उसी आधार पर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है। अफसर ने नहीं दिया जवाब जिला आबकारी अधिकारी गजेंद्र सिंह का कहना है कि दुकानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया के तहत नियमित जांच की जाती है और उसी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो विभाग नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगा। हालांकि, जब उनसे ठेकेदारों पर दबाव बनाने और धमकाने के आरोपों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। इस दौरान राजस्थान लिकर कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन, चित्तौड़गढ़ के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सुहालका, जिला उपाध्यक्ष विजय खटीक, मनोज सुहालका भी मौजूद रहे।