राजस्थान में 5 हजार अन्नपूर्णा भंडार खोलने की योजना कागजों और बैठकों में उलझकर रह गई है। सरकार ने 2 साल पहले इस योजना को दोबारा से शुरू करने की घोषणा की थी। योजना के तहत राशन की दुकानों पर चीनी, तेल, मसाले, चावल, तेल-साबुन समेत अन्य सामग्री सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना था। आखिर दो साल बाद भी सरकार अन्नपूर्णा भंडार क्यों नहीं खोल पाई? सरकार के सामने क्या चुनौतियां हैं? दैनिक भास्कर ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा से बात कर ऐसे सवालों के जवाब जाने। सवाल : अन्नपूर्णा भंडार योजना दो साल बाद भी शुरू नहीं हो पाई है, क्या वजह है? खाद्य मंत्री : देखिए, इसमें हम इसमें नवाचार करने का प्रयास कर रहे हैं। पर साथ में यह भी बात सत्य है कि भारत अब बहुत आगे बढ़ चुका है। गांवों में आजकल सभी तरह की अच्छी दुकानें खुल चुकी हैं। युवा व्यापारी आंत्रप्रेन्योर बनकर अच्छा व्यापार कर रहे हैं। यह हमारे लिए चुनौती है कि हम इस योजना का किस तरह से क्रियान्वयन करें, ताकि सुलभ और सस्ती दरों पर चीज उपलब्ध हो सके। सवाल : योजना लागू करना सरकार के लिए किस तरह चैलेंज है? खाद्यमंत्री : बिल्कुल हम मानते हैं। यह हमारे लिए चैलेंज है। अब वक्त बदल चुका है। कीमतों को लेकर प्रतियोगिता का दौर है। पहले समय और था…. दाम कम होता था तो लोगों का रूझान ( राशन की दुकानों पर) होता था। अब आदमी की खरीदने की क्षमता बढ़ी है। हमारा विभाग योजना के क्रियान्वयन पर काम कर रहा है। योजना को धरातल पर उतारना हमारे लिए चैलेंज है। सवाल : अन्नपूर्णा भंडार योजना में क्या-क्या उपलब्ध कराया जाएगा? खाद्यमंत्री : हम प्रयास कर रहे हैं कि खाने के पदार्थ मिले। जैसे-चीनी, चावल, मसाले, दालें। दूसरी चीजें शामिल करने के हम प्रयास कर रहे हैं। सवाल : योजना में भ्रष्टाचार न हो, क्या कदम उठाए जाएंगे? खाद्यमंत्री : इसलिए तो हम पूरी मॉनिटरिंग कर ही योजना लाएंगे। सरकार चाहती है कि योजना का क्रियान्वयन हो तो आमजन को लाभ मिले। देखिए, अभी गैस संकट आया था। लेकिन राजस्थान में कहीं भी आपको गैस की किल्लत नहीं आई। कोई शिकायत भी नहीं आई। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। गैस सिलेंडर का इश्यू उठा तो मुख्यमंत्री ने लगातार विभाग की बैठक लेकर आमजन को राहत दिलवाई। सवाल : आमजन को राहत दिलाने के लिए अगला कदम क्या होगा? खाद्यमंत्री : आने वाले दिनों में विधि एवं मापतौल विभाग की सक्रियता रहेगी। हम उपभोक्ताओं को क्या सहूलियतें दे सकें, यह हमारी प्राथमिकता रहेगी। देखिए, खाद्य सुरक्षा में तो हमारा विभाग ऑटोमोड पर आ चुका है। गिव अप अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) से 54 लाख लोग स्वेच्छा से हट गए हैं, जबकि 72 लाख नए लाभार्थी जोड़े गए हैं। बीजेपी सरकार ने शुरू की स्कीम, कांग्रेस में बंद अन्नपूर्णा भंडार योजना राजस्थान में 2015 में तत्कालीन बीजेपी सरकार लेकर आई थी। तब जयपुर समेत प्रदेश के तमाम शहरों में राशन की दुकानों पर अन्नपूर्णा भंडार खोले गए थे। इन भंडार केन्द्रों पर परचून का सामान सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाया गया था। वर्ष 2018 में गहलोत सरकार सत्ता में आई तो योजना को बंद कर दिया गया। इसके बदले गहलोत सरकार ने दुकानों पर गेहूं के साथ-साथ राशन का किट फ्री देने की योजना शुरू की थी। इसमें खाद्य तेल, मसालों के अलावा अन्य चीजों के पैकेट थे, लेकिन ये योजना भी सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी साल में शुरू की, जो चुनाव के बाद बंद हो गई। आखिर क्यों हुई थी बंद? तत्कालीन खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना था कि योजना का आम आदमी को फायदा नहीं मिल रहा था। जानकारों का कहना था कि उच्च कीमतें और उचित प्रबंधन के अभाव के कारण वह योजना विफल रही थी। उस समय दुकानों पर उपभोक्ताओं की पसंद और जरूरत का ध्यान रखे बिना महंगे उत्पाद थोपे जा रहे थे, जिसके कारण ग्राहकों ने इन भंडारों से दूरी बना ली थी। खाद्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अन्नपूर्णा भंडार योजना का मकसद राशन की दुकानों के माध्यम से आम लोगों को रियायती दरों पर ब्रांडेड खाद्य पदार्थ (दालें, तेल, मसाले, साबुन आदि) उपलब्ध कराना था। यह एक पीपीपी (सार्वजनिक-प्राइवेट भागीदारी) मॉडल था। उद्देश्य था- ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गांव में ही किराने के सामान की सुविधा मिल सके। भजनलाल सरकार ने फिर से शुरू करने की घोषणा की राज्य में सत्ता बदलने के बाद भजनलाल सरकार ने बजट 2025-26 के तहत प्रदेश में 5 हजार उचित मूल्य की दुकानों (राशन की दुकानों) को बहुउद्देशीय ‘अन्नपूर्णा भंडार’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। इन दुकानों पर राशन के अलावा दाल, तेल, मसाले, और ब्रांडेड उपभोक्ता वस्तुएं उचित दरों पर उपलब्ध कराई जानी है। इसका उद्देश्य डीलरों की आय बढ़ाना और आमजन को राहत देना है। योजना इसलिए उलझी
सरकार ने योजना को धरातल पर लाने के लिए पिछले साल दो बार टेंडर जारी किए थे। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया को लेकर राशन डीलरों ने विरोध जता दिया। राशन डीलरों ने राशन वितरण का कमीशन कम होने का हवाला दिया। डीलरों का कहना है कि सरकार कमीशन बढ़ाए, क्योंकि इस टेडर प्रक्रिया से राशन डीलरों के आर्थिक हित प्रभावित हो रहे हैं। डीलरों का कहना है कि अन्नपूर्णा भंडार शुरू करने के लिए 2,500 रुपए का आवेदन शुल्क मांगा गया, यह राशि ज्यादा थी। कई डीलरों ने अतिरिक्त कमाई की उम्मीद में रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे दिए लेकिन भंडार शुरू नहीं हुए, जिससे उनका पैसा फंसा हुआ है। मांग है कि यह फंसा हुआ पैसा दिया जाए। इसके बाद तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव भवानी सिंह देथा ने अन्नपूर्णा योजना में आ रही अड़चनों के लेकर विभागीय बैठकें भी की थीं। बात नहीं बनी। इसके बाद से अन्नपूर्णा योजना टेंडरों, बैठकों और कागजों के जाल में ही उलझी हुई है। योजना के नियम और शर्तें भी बाधा सरकार के निर्देशों के अनुसार, अन्नपूर्णा भंडार खोलने के लिए उचित मूल्य की दुकान डीलर की खुद की होनी चाहिए। दुकान का न्यूनतम एरिया 10 बाई 20 (200 वर्गफीट), दुकान का कम से कम 30 फीट रोड पर खुलती हो, इस मॉडल को स्वीकार करने के लिए उचित मूल्य का दुकानदार सहमत होना चाहिए। राशन डीलर निर्देशों को लेकर नाराजगी जता चुके हैं।