भीलवाड़ा शहर की सरकारी स्कूल में टीचर ने 8वीं के छात्र से 200 उठक-बैठक लगवाई। जिससे बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। स्कूल स्टाफ उसे इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल ले गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई है। जानकारी मिलते ही परिजन बच्चे को लेकर स्कूल पहुंचे और हंगामा किया। हंगामा बढ़ता देख बीएड महिला टीचर स्कूल से रवाना हो गई। बच्चे की मां ने कहा- महिला टीचर ने मेरे बेटे को टॉर्चर किया है। अगर उसकी मौत हो जाती तो कौन जिम्मेदार होता। हंगामा होते देख आरोपी महिला टीचर स्कूल से रवाना हो गई। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के कावाखेड़ा राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में सोमवार का है। पढ़ाई नहीं करने पर दी थी सजा कावाखेड़ा के सरकारी स्कूल में बीएड की इंटर्नशिप कर रही एक महिला टीचर ने 8वीं के छात्र को पढ़ाई नहीं करने पर सजा दी। टीचर पर आरोप है कि उसने छात्र से क्लास रूम में 200 उठक-बैठक लगवाई। इससे बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और वह क्लास रूम में ही बेहोश हो गया। मां बोली- पहले भी करवाई थी उठक- बैठक बच्चे की मां ने कहा- कुछ दिन पहले ही बेटे का कावाखेड़ा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में अस्थाई एडमिशन करवाया है। महिला टीचर ने मेरे बेटे से 200 उठक-बैठक लगवाई। शनिवार को इन्हीं मैडम ने मेरे बेटे से 100 उठक-बैठक लगवाई थी। सोमवार को 200 उठक-बैठक लगवाई। इससे मेरे बेटे की हालत बिगड़ गई और उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। स्कूल पढ़ाई करवाने के लिए है, लेकिन यहां भीषण गर्मी में सैकड़ों उठक-बैठक लगवाई जा रही है। ऐसे में बच्चे को अगर कुछ हो जाता या वह मर जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। स्टाफ इंचार्ज बोले- बेवजह माहौल बनाया जा रहा स्टाफ इंचार्ज प्रदीप मेहता ने कहा- बच्चे को 200 उठक-बैठक लगावाने की बात गलत है। बच्चे के पढ़ाई नहीं करने पर संभवत: मैडम ने उससे कुछ उठक-बैठक लगवाए होंगे। मैंने उन्हें समझा दिया था और डांट भी दिया था कि इस तरीके से बच्चों से उठक बैठक नहीं लगवाएं और बच्चों को ऐसी सजा देनी भी नहीं है। मेहता के अनुसार, यह बच्चा इस स्कूल का नहीं है। इसे अस्थाई एडमिशन दिया है। बच्चों के पेरेंट्स द्वारा बेवजह माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोपों को गलत बताया है।