जोधपुर में लकवाग्रस्त गवाह के बयान दर्ज करने के लिए कोर्ट को फर्स्ट फ्लोर से ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट किया गया। जमीन विवाद के दौरान स्कॉर्पियो से कुचले जाने के कारण पीड़ित चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ है। राजीव गांधी नगर थाना क्षेत्र के चौखा के रहने वाले सेठाराम (41) पुत्र लूणाराम को शुक्रवार को एंबुलेंस से कोर्ट लाया गया था। सेशन कोर्ट संख्या-3 में उसे गवाही देनी थी। वकील के निवेदन पर ग्राउंड फ्लोर पर अस्थाई रूप से कोर्ट शिफ्ट करके गवाही दर्ज करवाई गई। आमतौर पर ऐसे मामलों में न्यायालय या तो कमीशन नियुक्त करता है या अस्पताल/आवास पर बयान दर्ज करवाता है। विशेष अनुमति से नीचे लगी अदालत मामले की नियमित सुनवाई सेशन न्यायालय संख्या-3 (फर्स्ट फ्लोर) में चल रही है। गवाह के स्ट्रेचर पर होने और बैठने की स्थिति में भी न होने के कारण परिवादी के वकील अक्षय सुराणा ने ग्राउंड फ्लोर पर बयान दर्ज करने का निवेदन किया। जिस पर बचाव पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश से अनुमति मांगी गई। मौखिक अनुमति मिलने पर गवाह के बयान ग्राउंड फ्लोर पर स्थित अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-2 के कक्ष में लेने का फैसला लिया गया। दोनों पक्षों की उपस्थिति में स्ट्रेचर पर लेटे हुए पीड़ित से सामान्य बातचीत कर उसकी मानसिक स्थिति जांची गई। फिर उसके बयान दर्ज किए गए। स्कार्पियो से कुचलने से आधा शरीर हुआ सुन्न पीड़ित सेठाराम ने कोर्ट को बताया-12 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:30 बजे मैं अपनी पत्नी छैनादेवी के साथ मकान के पीछे स्थित बाड़े में गायों को चारा डालकर बाहर निकला था। एक बिजली के पोल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जगह देख रहा था। इसी बीच सफेद रंग की स्कोर्पियो कार आई, जिसमें मेरे चाचा के लड़के अशोक, महेश और दिनेश सवार थे। तीनों ने नीचे उतरकर बाड़ा खाली करने की धमकी दी और गाली-गलौज की। इसके बाद तीनों वापस गाड़ी में बैठ गए और अशोक ने जानबूझकर मुझ पर कार चढ़ा दी। इससे मेरे रीढ़ की हड्डी, दोनों पैर, पसलियों और कंधे में गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद से मेरे कमर के नीचे का आधा हिस्सा आज भी काम नहीं कर रहा है। चलने-फिरने में पूरी तरह अक्षम हूं। कुल्हाड़ी से हमले और पथराव का लगाया आरोप बचाव पक्ष के वकील ने क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान पुलिस बयानों और कोर्ट में दी गई गवाही में विरोधाभास होने के सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना के समय सेठाराम और उसकी पत्नी ने अशोक के साथ मारपीट की थी। उसकी गाड़ी पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया था। बचाव पक्ष का आरोप था कि जान बचाने के लिए अशोक जब गाड़ी की तरफ भागा, तब सेठाराम खुद गिरकर घायल हो गया और उसके सिर में चोटें आईं। इसके अलावा बचाव पक्ष ने बिजली के पोल पर बिना अनुमति कैमरे लगाने और कैमरे लगाने वाले बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए। बचाव पक्ष ने यह भी पूछा कि क्या इस विवाद के चलते पहले कभी थाने में रिपोर्ट दी गई या कोई अन्य केस दर्ज हुआ, जिस पर सेठाराम ने वही जवाब दोहराया कि ऐसी जानकारी उसके पिता के पास है। टक्कर के बाद बेहोश हो गया था बचाव पक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सेठाराम ने गवाही दी कि गाड़ी उसके ऊपर चढ़ने के बाद वह तुरंत बेहोश हो गया था और उसे सात से आठ दिन बाद अस्पताल में इलाज के दौरान होश आया था। इसलिए उसे नहीं पता कि गाड़ी पर पथराव किसने किया या उसे अस्पताल कौन लेकर गया। पीड़ित ने स्पष्ट किया कि विवादित बाड़ा उसके पिता के नाम पर है और कैमरे लगाने वाला व्यक्ति घटना (कहासुनी) शुरू होने से पहले ही वहां से चला गया था।