भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य सरकार से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) से पड़ने वाले आर्थिक भार पर रिपोर्ट मांगी है। कैग ने अगले 10 साल तक ओपीएस से सरकार के खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर जानकारी मांगी है। कैग ने राज्य के आर्थिक हालात और बजट को लेकर भी रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के लिए अंतिम तारीख 15 जून तय है। यह सब जानकारियां मांगने के पीछे एफआरबीएम एक्ट के प्रावधनों का हवाला दिया है, जिसके तहत ये सब रिपार्ट और जानकारियां कैग से साझा करना जरूरी है। बता दें कि राज्य में साल 2022 में कांग्रेस सरकार ने एनपीएस की जगह ओपीएस लागू करने का फैसला किया था। बजट दस्तावेजों में छिपाए कर्ज (ऑफ बजट बोरोइंग) का ब्यौरा मांगा, ये आंकड़े छिपाए जाते रहे हैं कैग ने सरकार से बजट दस्तावेजों में छिपाए गए कर्ज यानी ऑफ बजट बोरोइंग का अलग से ब्यौरा मांगा है। यह कर्ज सरकार ने खुद नहीं लेकर सरकार की अलग-अलग संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों के जरिए लिया गया है। यह कर्ज सरकार बजट दस्तावेजों में नहीं दिखाती, इसलिए सरकार पर कर्ज का आंकड़ा और राजकोषीय घाटा कम दिखता है। कैग ने चिट्ठी में हवाला दिया है कि 16वें वित्त आयोग ने इसकी सिफारिश दी है की फाइनेंस अकाउंट्स बहुत डिटेल में होने चाहिए। इनमें सब्सिडी और ऑफ बजट बोरोइंग्स का अलग से ब्यौरा होना चाहिए। सरकार ने 2025-26 में ऑफ बजट कितना उधार लिया है, उनका पूरा ब्यौरा मांगा है। इसमें ग्रांट, ब्याज भुगतान के लिए लिया गया कर्ज, सरकारी कंपनियों, स्थानीय निकायों, पंचायतीराज संस्थाओं, बोर्ड निगमों का लिया गया कर्ज शामिल है। सरकार के खातों में कितना पैसा बिना खर्च किए बचा, यह बताना होगा कैग ने सरकार से पूछा है कि उसके खातों में कितना पैसा ऐसा है, जो बिना खर्च किए हुए बचा हुआ है। यह पैसा योजनाओं का है। कैग ने बैंक खातों में बिना खर्च किया हुआ बैलेंस, सरकारी विभागों के स्टोर्स का सालाना वेरिफिकेशन का ब्यौरा मांगा है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अधूरे कामों की लिस्ट मांगी गई है। सरकारी जमीनों को बेचने और उनकी लीज पर देने का ब्यौरा और सरकारी संपत्तियों के जियो टैगिंग का स्टेटस भी पूछा है। कैग ने लिखा- पिछले साल आधी अधूरी सूचनाएं भेजी, इस साल ऐसा नहीं हो कैग ने वित्त विभाग को लिखी चिट्ठटी में तय डेडलाइन तक सभी सूचनाएं भेजने को कहा है। कैग के मुताबिक पिछले साल बजट से जुड़े आंकड़े और सूचनाएं आधी आधूरी और देरी से भेजी गई थीं। इस बार पिछली बार की गलती नहीं दोहराने की हिदायत दी है। 15 जून तक हर हाल में सभी रिपोर्ट, ब्यौरा भेजने को कहा है। कैग ने पूछा- लोकलुभावन योजनाओं में कितनी नकदी ट्रांसफर की, कितना डीबीटी किया कैग ने लोकलुभवन योजनाओं में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के बारे में ​योजनावार पूरा ब्यौरा भेजने को कहा है। बिजली पर दी गई सब्सिडी सहित सभी तरह की सब्सिडी पर योजनावार ब्यौरा देने को कहा है। किसान सम्मान निधि से लेकर अलग-अलग योजनाओं में किसे कितना कैश ट्रांसफर किया, इसका पूरा ब्यौरा मांगा है। सरकार से ब्यौरा मिलने के बाद परीक्षण करेगा कैग, गड़बड़ी मिलने पर सालाना रिपोर्ट में आएगा सरकार से ब्यौरा मिलने के बाद कैग अपनी ऑडिट में सभी योजनाओं, सरकारी कर्ज, आय और खर्च के बारे में बारीकी से जांच होगी। प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर कैग ऑडिट पैरा बनाएगा। इसे सालाना रिपोर्ट में भी शामिल किया जाएगा। कैग की रिपोर्ट हर साल विधानसभा में पेश होती है, इस रिपोर्ट में शामिल आपत्तियों पर विधानसभा की जनलेखा समिति(PAC) जांच करती है। कार्रवाई की सिफारिश करती है। ये भी पढ़ें… राजस्थान सरकार ने मामूली खर्चा चलाने को भी लिया उधार:कैग की रिपोर्ट में सरकार की आर्थिक हालत चिंताजनक, आर्थिक सर्वेक्षण में घाटे में कमी राजस्थान सरकार सामान्य प्रशासनिक खर्च के लिए भी उधार ले रही है। विधानसभा में 3 फरवरी को पेश हुई कैग रिपोर्ट के अनुसार इस उधार के लिए सरकार भारी-भरकम ब्याज चुका रही है। वहीं, इस रिपोर्ट में सरकार ने कहां-कहां निवेश किया है इसकी भी जानकारी है। सरकार ने आम आदमी के 62 हजार करोड़ रुपए भी अलग-अलग सरकारी कंपनियों व अन्य जगह निवेश कर रखा है। (पूरी खबर पढ़ें)