भीलवाड़ा में गंगापुर कस्बे के बीचों-बीच करोड़ों रुपए की लागत से शुरू हुई सड़कें सालों से अधूरी पड़ी हैं। पांच साल गुजरने के बाद भी जब इनकी किसी ने सुध नहीं ली तो पार्षद और व्यापारी नगर पालिका के बाहर अनशन पर बैठ गए।
सोमवार से शुरू हुए इस अनशन के दूसरे दिन मंगलवार देर रात 2 पार्षदों की तबीयत बिगड़ गई उन्हें गंगापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अनशन पर बैठे जनप्रतिनिधि और व्यापारी
सोमवार से नगर पालिका के बाहर पार्षद प्रहलाद सुथार, पार्षद पंकज चौहान, पार्षद राकेश व्यास और व्यापारी मनीष ओझा आमरण अनशन पर बैठे। अनशन के दौरान ही 2 पार्षदों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में एडमिट करवाया। अनशनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सड़क का काम शुरू नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। व्यापार मंडल ने दी खुली चेतावनी- बाजार बंद करेंगे
व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय रुईया ने कहा-अब धैर्य की सीमा खत्म हो चुकी है। यदि प्रशासन तुरंत सड़क निर्माण शुरू नहीं करता तो पूरा व्यापार मंडल भी अनशन में शामिल होगा और पूरा मार्केट बंद कर दिया जाएगा। 12 करोड़ की सड़क, 5 साल से अधूरी
कोर्ट चौराहा से मिलगेट तक लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू हुआ था। लेकिन 5 साल 3 महीने बाद भी यह अधूरा पड़ा है। यह सड़क अब गड्ढों और धूल का अंबार बन चुकी है। इसी तरह भैरुजी बावजी से सहाड़ा चौराहा तक करीब 8 करोड़ की लागत से सड़क स्व. कैलाश त्रिवेदी के नाम से बनाई जानी थी, मगर यह काम भी आधे में ही अटका पड़ा है। लोगों का कहना है कि यह अधूरी सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं, वाहन पलटते हैं, लोग चोटिल होते हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। व्यापारियों का दर्द- आंदोलन से लेकर पुतला दहन तक
पिछले 5 वर्षों में व्यापारियों ने कई बार विरोध दर्ज कराया। कभी बाजार बंद किया, कभी धरना दिया, कभी पालिका अध्यक्ष और जिम्मेदारों का पुतला फूंका। लेकिन हर बार उन्हें केवल जल्द काम शुरू होगा जैसे आश्वासन ही मिले। बरसात के मौसम में कुछ जगह ग्रेवल डालकर लीपापोती कर दी जाती है, लेकिन सड़क का काम शुरू ही नहीं होता। चुनावों में हर बार मिलता है आश्वासन
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब विधायक गायत्री देवी त्रिवेदी ने इसे पूरा कराने का वादा किया था। इसके बाद विधायक लादूलाल पितलिया ने भी चुनाव प्रचार के दौरान यही भरोसा दिलाया। मगर दो-दो चुनाव बीत गए, सड़कें वहीं की वहीं अधूरी पड़ी हैं। जनता में आक्रोश- कितना और सब्र करें?
नागरिकों का कहना है कि धूल, गड्ढों और कीचड़ से उनकी जिंदगी नरक बन चुकी है। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है, व्यापार प्रभावित है और आए दिन दुर्घटनाओं से लोग घायल हो रहे हैं। पांच साल में भी यदि सड़क पूरी नहीं हो सकती तो प्रशासन और जनप्रतिनिधि आखिर जनता के किस काम के? प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं
अनशन की खबर मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे और बातचीत की कोशिश की। लेकिन अनशनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि अब केवल बातचीत से नहीं, सड़क निर्माण शुरू होने से ही अनशन खत्म होगा।जनता और व्यापारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक होगा और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
