लुधियाना की एक अदालत ने 2012 के चर्चित APL गेहूं घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 लोगों को सजा दी है। स्पेशल जज अमरिंदर सिंह शेर गिल ने सजा का ऐलान किया, जबकि 23 मार्च को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। इस केस में कुल 30 आरोपी थे, जिनमें 17 दोषी करार हुए। 6 आरोपी बरी हुए। 5 की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। 1 आरोपी भगोड़ा घोषित हुआ है। 1 के खिलाफ कार्यवाही खत्म हो चुकी है। कोर्ट ने 13 आरोपियों को 5-5 साल की सजा सुनाई है। 4 आरोपियों को 4-4 साल की सजा सुनाई है। दोषियों में ज्यादातर डिपो होल्डर हैं, जबकि एक फ्लोर मिल मालिक और एक प्राइवेट फर्म का मालिक भी शामिल है। क्या था पूरा घोटाला यह मामला 1 सितंबर 2012 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि 1100 से ज्यादा गेहूं के बैग सरकारी योजना के तहत जनता को मिलने थे।इन्हें फर्जी गेट पास के जरिए गोदाम से निकाला गया। बाद में प्राइवेट फ्लोर मिलों को बेच दिया गया। यह गेहूं पंजाब एग्रो के माछीवाड़ा गोदाम से उठाया गया था और इसे पनग्रेन को भेजा जाना था, लेकिन एजेंसी ने गेहूं से लदे ट्रकों से कोई संबंध होने से इनकार कर दिया था। जांच में क्या खुलासा हुआ विजिलेंस जांच में पाया गया कि सरकारी अधिकारियों और निजी लोगों की मिलीभगत थी। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर गेहूं बाहर निकाला गया। इसे पात्र परिवारों तक पहुंचाने की बजाय निजी लाभ के लिए बेचा गया। अदालत ने इस केस में कहा कि दोषी आरोपी एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थे। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी गेहूं की हेराफेरी कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। वहीं 6 आरोपियों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ दिया गया। क्या है APL योजना
APL योजना के तहत उन परिवारों को सस्ती दरों पर गेहूं दिया जाता था, जो गरीबी रेखा से ऊपर होने के बावजूद सरकारी सहायता के जरूरतमंद होते हैं।