बूंदी के नैनवां में ‘स्मार्ट गर्ल्स’ कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने युवा बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी।
माताजी ने अपने प्रवचन में संसार के निरंतर चलते चक्र का उल्लेख किया और सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बिल्ली और चूहे के उदाहरण से समझाया कि जिस प्रकार कुछ प्रवृत्तियां स्वभाववश होती हैं, उसी प्रकार संसार में भी सतर्कता अनिवार्य है। ‘अनजान लोगों पर विश्वास नहीं करें’
उन्होंने विशेष रूप से युवा बेटियों को आगाह किया कि घर के बाहर उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ सकता है। बिना जाने-पहचाने किसी भी व्यक्ति पर विश्वास नहीं करें, क्योंकि अंधविश्वास कई बार नुकसान का कारण बनता है। माताजी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल कुछ लड़कियां माता-पिता से झूठ बोलकर पार्टियों में जाती हैं, जहां शराब और सिगरेट जैसे दुर्व्यसनों का खतरा रहता है। ऐसे वातावरण से बचना चाहिए, क्योंकि गलत आदतों के दुष्परिणाम भविष्य में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकते हैं। युवतियों को सतर्क रहने की सलाह
उन्होंने बताया कि माता-पिता ही निस्वार्थ भाव से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं। माताजी ने भोली-भाली लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर शोषण किए जाने की घटनाओं से भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने जोर दिया कि स्वयं की सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव है। 100 से ज्यादा बेटियों ने कार्यशाला में लिया भाग
इस कार्यशाला में 100 से अधिक बालिकाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण देने आए रत्नाकर महाजन (तीर्थराज सम्मेद शिखर) ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों और वीडियो के माध्यम से आत्मरक्षा के उपाय सिखाए। आत्मविश्वास और साहस का दिया संदेश
उन्होंने बालिकाओं को बताया कि अपने शरीर की शक्ति को पहचानें- हाथ ही सबसे बड़ा हथियार है और आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा के लिए उसका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने इंदिरा गांधी और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे उदाहरण देकर लड़कियों को आत्मविश्वास और साहस का संदेश दिया। कार्यक्रम में सुषमा जैन, सरिता जैन, पूनम जैन, पायल जैन सहित कई बालिकाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें इस प्रशिक्षण से नई जानकारी और आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। अंत में बताया गया कि लड़कियों की खामोशी गलत तत्वों का हौसला बढ़ाती है, इसलिए उन्हें सजग और आत्मनिर्भर बनना चाहिए। माता-पिता के संस्कारों को जीवन में अपनाना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
