डीडवाना के ग्राम रामसाबास में कस्टोडियन भूमि पर बसे दलित परिवारों को बेदखल करने के कथित प्रयासों के विरोध में शुक्रवार को मेघवाल समाज ने प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि वे रामसाबास गांव के निवासी हैं और अनुसूचित जाति के मेघवाल समाज से संबंध रखते हैं। उनके परिवार पिछले करीब 100 वर्षों से अधिक समय से गांव के विभिन्न खसरा नंबरों पर स्थित हेक्टेयर भूमि पर निवास कर रहे हैं। हालांकि, राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि कस्टोडियन के नाम दर्ज है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम लाडाबास के कुछ प्रभावशाली लोग इस भूमि पर कब्जा करने की नीयत से उन्हें लगातार डरा-धमका रहे हैं। उनका कहना है कि ये लोग लाठी और संख्या बल के आधार पर उन्हें घर खाली करने की धमकी देते हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विपक्षी यह कहकर दबाव बना रहे हैं कि उनके पूर्वज देश छोड़कर चले गए थे, इसलिए अब जमीन पर उनका अधिकार है। पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे गरीब मजदूर वर्ग से हैं और गांव में अल्पसंख्या में होने के कारण दहशत के माहौल में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि कुछ लोग इस जमीन को अन्य असामाजिक तत्वों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे भविष्य में विवाद और बढ़ सकता है। मेघवाल समाज ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी पुश्तैनी बसावट को उजाड़ने से रोका जाए। साथ ही, उन्हें धमकाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि वे शांतिपूर्वक अपने घरों में रह सकें। इस प्रदर्शन के दौरान रामसाबास मेघवाल समाज के दर्जनों पुरुषों के साथ महिलाएं मौजूद रहीं। इनमें मौलासर पंचायत समिति की पूर्व प्रधान मंजू मेघवाल, डीडवाना मेघवाल विकास संस्थान के अध्यक्ष एस.आर. लूनिया, भाजपा नेता डालूराम मेघवाल और बुधाराम गरवा सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।
